इससे पूर्व 1995 में दीपवाली के दिन सूर्य ग्रहण पड़ा था। ग्रहण हमेशा अमावस्या की तिथि को पड़ता है और दिवाली भी अमावस्या तिथि में ही मनाई जाती है। सूर्य ग्रहण के कारण लक्ष्मी पूजन पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके साथ ही आठ नवंबर को देव दिवाली के दिन साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी देखने को मिलेगा।
कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए
दो प्रमुख त्योहार के बीच ग्रहण पड़ने के साथ बुध, गुरु, शुक्र और शनि सभी अपनी-अपनी राशि में मौजूद रहेंगे। साल का यह आखिरी आंशिक सूर्यग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में सूर्यग्रहण दिखाई देने से इसका सूतक काल मान्य होगा। इस कारण ग्रहण के दौरान कोई शुभ काम या देवी-देवताओं की पूजा नहीं करनी चाहिए।
ग्रहण के दौरान न ही भोजन पकाना चाहिए और न ही कुछ खाना-पीना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण नहीं देखना चाहिए। और न ही घर से बाहर जाना चाहिए। तुलसी समेत अन्य पेड़-पौधों को नहीं छूना चाहिए। इस दौरान अपने इष्ट देवी-देवताओं के नाम का स्मरण करना चाहिए।