छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) और संबद्ध महाविद्यालयों में पिछली बार की तरह इस बार फर्जी मार्कशीट लगाकर स्नातक या परास्नातक में कोई भी एडमिशन नहीं ले पाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार पहले से ही सख्ती शुरू कर दी है।
वेब रजिस्ट्रेशन नंबर (डब्ल्यूआरएन) प्रक्रिया में ऐसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया है जिसमें फर्जी डिटेल डालते ही सब कुछ पकड़ में आ जाएगा। इसके बाद ऐसे छात्रों का आवेदन ही स्वीकार नहीं होगा। पिछले सत्र में कई छात्रों ने महाविद्यालयों के साथ मिलकर परास्नातक में फर्जी तरीके से एडमिशन ले लिया था। जिसका ‘अमर उजाला’ 26 नवंबर 2018 को खुलासा किया था। इसके बाद जांच में यह साबित होने पर करीब 500 छात्रों का एडमिशन रद्द कर दिया गया था।
ऐसे पकड़ में आएगा फर्जीवाड़ा
सीएसजेएमयू (फाइल फोटो)
- फोटो : गूगल
दरअसल अभी तक डब्ल्यूआरएन के लिए छात्र जो डेटा विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर फीड करते थे, उसकी कोई जांच नहीं होती थी। इसका फायदा उठाते हुए बड़ी संख्या में छात्र हाईस्कूल-इंटरमीडिएट यहां तक ही स्नातक की फर्जी डिग्री-मार्कशीट लगाकर अलग-अलग कोर्स में एडमिशन ले लेते थे।
ऐसी धांधली अब नहीं होगी क्योंकि प्रवेश के लिए जरूरी डब्ल्यूआरएन जनरेट करते समय ही इसका पता चल जाएगा। मसलन अगर छात्र स्नातक में दाखिले के लिए डब्ल्यूआरएन जनरेट कर रहा है तो उसे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का रोल नंबर, माता-पिता का नाम, परसेंटेज आदि वेबसाइट पर फीड करने होंगे। जैसे ही छात्र यह जानकारियां फीड करेगा, वेबसाइट ऑटोमेटिक संबंधित बोर्ड से इसका सत्यापन कर लेगी।
अगर रिकॉर्ड सही रहा तो डब्ल्यूआरएन जनरेट हो जाएगा और नहीं तो रिजेक्ट हो जाएगा। इसी तरह स्नातक के रिकॉर्ड भी सत्यापित होंगे। परास्नातक में प्रवेश के लिए भी छात्र जैसे ही स्नातक अंतिम वर्ष का अनुक्रमांक डालेगा, उसका नाम, पिता का नाम, पता, संबंधित कॉलेज और अंक ऑटोमेटिक रीड हो जाएंगे।
आधार कार्ड से भी लिंक करने की तैयारी, अक्षरों की त्रुटि भी होगी कम
रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जल्द डब्ल्यूआरएन वेबसाइट को आधार कार्ड से लिंकअप करने की तैयारी है। इससे अनेक तरह की समस्याएं खत्म हो जाएंगी। साथ ही गलत फोटो अपलोड या अन्य तरह की समस्याएं भी नहीं आएंगी।
विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए सबसे बड़ी समस्या नाम, पिता के नाम के अक्षरों में त्रुटि की होती है। मतलब हाईस्कूल या इंटर में नाम की स्पेलिंग कुछ और होती थी और स्नातक की अंकतालिका में कुछ और। इससे डिग्री जारी होने में दिक्कत होती है। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रक्रिया से जब ऑटोमेटिक इंटर के अनुसार नाम, पिता का नाम लेगा तो स्पेलिंग मिस्टेक जैसी समस्या काफी कम होगी।