कनपुरियों के लिए मसीहा बनीं प्रीति श्रीवास्तव
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सर, मैं मनोज बोल रहा हूं। प्रीति मैम के अथक प्रयास से मेरी बिटिया के आपरेशन के लिए लोहिया हास्पिटल लखनऊ में अप्वाइंटमेंट 30 जुलाई का मिल गया है। आपको लाख-लाख शुक्त्रिस्या। मैं उनके इस प्रयास व सहयोग की अनुभूति को व्यक्त करने में असमर्थ हूं। इसको सिर्फ महसूस ही कर पा रहा हूं।
मूलरूप से प्रतापगढ़ निवासी मनोज सिंह काफी समय से कानपुर में रह रहे हैं। उनकी दिव्यांग बिटिया के पैर का आपरेशन होना था, जिसके लिए डॉक्टर से समय नहीं मिल पा रहा था। वानर सेना के अजित सिंह के माध्यम से जब प्रीति श्रीवास्तव तक यह बात पहुंची तो उन्होंने बच्ची के आपरेशन के लिए समय ही नहीं दिलाया बल्कि डाक्टरों से बात कर उसके आपरेशन की पूरी व्यवस्था भी करा दी। झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली प्रीति श्रीवास्तव की ओर से की गई यह सहायता सिर्फ एक बानगी है।
इसी तरह कानपुर सहित प्रदेश और देश के अलग-अलग जगहों पर रहने वाले जरूरतमंदों के लिए वह मसीहा बनकर उभरी हैं। कानपुर से करीब 800 किलोमीटर दूर बैठकर भी लोगों की मदद करने वाली प्रीति हेलीकॉप्टर मैडम के नाम से चर्चित हो रही हैं। पिछले दिनों जरूरतमंदों की सेवा करने वाले बड़े संगठन देवदूत वानर सेना के जरिये जब प्रीति को पता चला कि कानपुर देहात के छात्र मंगल पांडेय अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी सिर्फ खराब मोबाइल की वजह से नहीं कर पा रहे हैं तो उन्होंने बिना देरी किए कानपुर की मनप्रीत कौर से संपर्क कर तत्काल मयंक को नया मोबाइल भिजवा दिया।
इसी तरह पदमपति सिंहानियां स्कूल में एक बच्ची का आरटीई के तहत एडमिशन करने में स्कूल की तरफ से हीलाहवाली की जा रही थी। तब प्रीति ने मोर्चा संभाला और शिकायत मिलने के चार दिन के अंदर ही बच्ची का एडमिशन करा दिया। बच्ची और उसके माता पिता इस खुशी से फूले नहीं समाए। प्रीति की तरफ से जरूरतमंदों की सेवा का यह सिलसिला लगातार जारी है। प्रीति की सेवा का लाभ पाने वालों कानपुर के लोगों की संख्या भी काफी है।
परिचय...
प्रीति श्रीवास्तव
वाइस प्रेसीडेंट, ऑर्गेनिक वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड
अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, देवदूत वानर सेना
मूल निवास देवरिया उत्तर प्रदेश
वर्तमान निवास-राची झारखंड
500 बच्चों को निशुल्क देती हैं शिक्षा
प्रीति श्रीवास्तव करीब 500 जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं। इसके लिए उन्होंने बाकायदा देवरिया में स्कूल खोला है। उनकी योजना है कि कानपुर सहित प्रदेश के कई और शहरों में इसी तरह के स्कूल खोलकर जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित किया जाए। वर्तमान में उन्होंने तीन ऐसे बच्चों को अपने साथ रखा है जिनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वह बताती हैं कि कोरोना काल से उन्होंने लोगों की सेवा का काम दूसरी जगहों पर करना शुरू किया। यह तब संभव हो पाया जब वह अजित सिंह की देवदूत वानर सेना से जुड़ीं।