कानपुर। स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य है लेकिन इसे प्रीपेड करने से पहले उपभोक्ता की सहमति जरूरी है। उप्र विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने सोमवार को आर्यनगर स्थित द स्पोर्ट्स हब में बिजली कंपनियों की 25 फीसदी टैरिफ वृद्धि के प्रस्ताव पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। आयोग अध्यक्ष ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के मीटरिंग विनियमन में एक अप्रैल 2026 को हुए संशोधन का हवाला दिया।
केंद्र सरकार ने 28 फरवरी 2022 को स्मार्ट मीटर कनेक्शन प्रीपेड मोड में देना अनिवार्य किया था। एक अप्रैल 2026 को सरकार ने यह नियम वापस ले लिया। अब स्मार्ट मीटर पोस्टपेड होगा या प्रीपेड, यह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा। प्रीपेड मीटर पर बिजली बिल में दो फीसदी छूट मिलती है और जमानत राशि जमा नहीं करनी पड़ती। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बिजली 25 फीसदी महंगी करने के प्रस्ताव को गलत बताया। कहा कि उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये विद्युत निगम पर बकाया है। इस अधिशेष को अदा किए बिना दरें नहीं बढ़ाई जा सकतीं, बल्कि 45 फीसदी कम करनी पड़ेंगी। आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार ने सभी वितरण कंपनियों की जनसुनवाई के बाद दरों में बदलाव पर फैसला लेने की बात कही।
बाबूपुरवा और बेगमपुरवा में बिजली समस्या तथा गरीब उपभोक्ताओं के पूर्व भुगतान स्मार्ट मीटर बंद होने की बात बताते हुए पार्षद पति अकील शानू रो पड़े। आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार ने उनसे संयम बरतने और लिखित शिकायत देने को कहा। उद्यमियों ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को गलत बताते हुए स्मार्ट मीटर लगाने की मांग की। आयोग सदस्य संजय कुमार सिंह ने बताया कि अधिक भार झेलने वाले स्मार्ट मीटर अभी उपलब्ध नहीं हैं। इनकी व्यवस्था जल्द की जाएगी।