कानपुर। किडनी ट्रांसप्लांट ग्रुप से कई साइबर अपराधी और शातिर जुड़े थे। ये रुपये कमाने का लालच देकर युवाओं को छोटे टास्क दिया करते थे। बेगूसराय निवासी किडनी डोनर आयुष भी शुरू में उनके दिए टास्क पूरे कर रहा था। यह जानकारी पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच को टेलीग्राम के किडनी डोनर नामक ग्रुप से हुई है। पुलिस की धरपकड़ से अधिकतर साइबर अपराधी किनारे हो गए हैं। उनकी तलाश में इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर का सहयोग लिया जा रहा है।
किडनी ट्रांसप्लांट मामले के आरोपी डॉ. अफजल के साथ गाजियाबाद में लूट व डकैती से जेल गए सरफराज सैफी का नाम सामने आया है। आहूजा हॉस्पिटल के कर्मचारी शिवम अग्रवाल के मोबाइल में दोनों की रुपयों के साथ वीडियो मिली है। पुलिस को मोबाइल से 25 से अधिक वीडियो और फोटो बरामद हुई हैं। इनकी साइबर सेल और साइबर क्राइम ब्रांच जांच कर रही है। टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन की तलाश शुरू हो गई है। उसके लिए आईपी एड्रेस को देखा जा रहा है।
डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि किडनी डोनर ग्रुप में 700 से ज्यादा सदस्य थे। युवाओं को किडनी ट्रांसप्लांट के डोनर और रिसीवर खोजने के अलावा रुपये कमाने का लालच दिया जा रहा था। इसमें साइबर अपराधी भी शामिल थे। अब तक हुई जांच में 40 से अधिक म्यूल नंबर मिले हैं जिन्हें फर्जी तरीके से हासिल कर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाया गया है। ग्रुप में हवाला कारोबार से जुड़े आरोपी भी हो सकते हैं। यह मोटा पैसा लेकर केस खोजने का कार्य कर रहे थे। सोशल मीडिया पर किडनी ट्रांसप्लांट होने की सुविधा का मैसेज भी किया जा रहा था। पुलिस आरोपियों की जानकारी जुटा रही है। वहीं, डीसीपी के अनुसार पहली बार अस्पताल में दबिश के समय पारुल का पति भी मौके पर था जो बाद में भाग निकला। उसके बारे में पता लगाया जा रहा है।
पुलिस को महाराष्ट्र के एक आरोपी का कनेक्शन मिल गया है। पुलिस इसकी तलाश में है। यह आरोपी वहां के बड़े अस्पताल से संपर्क रखे हुए था। कुछ मरीजों को दिल्ली और एनसीआर के अस्पतालों में भी भेजा गया था। पुलिस इस आरोपी की और जानकारी जुटा रही है।