झांसी इंटरसिटी में चढ़ गईं थीं दोनों
स्कूल पहुंचने पर आठ जुलाई तक छुट्टी होने की जानकारी हुई। इसलिए दोनों सुबह 10:40 बजे झांसी पैसेंजर से जैतीपुर जाने के लिए उन्नाव जंक्शन पहुंचीं। लेकिन पैसेंजर पहले जा चुकी थी। इसकी जानकारी न होने पर दोपहर 12:40 बजे झांसी इंटरसिटी उन्नाव पहुंची, तो दोनों उसमें चढ़ गई।
चलती ट्रेन से दोनों कूद गईं
ट्रेन बीच के स्टेशनों पर नहीं रुकी, तब दोनों को गलत ट्रेन में बैठने की जानकारी हुई। जैतीपुर स्टेशन पर भी ट्रेन के न रुकते देख चलती ट्रेन से दोनों कूद गईं। दोनों बहनें चार भाई बहनों में दूसरे और तीसरे नंबर की थीं। बेटी की मौत से मां मुन्नी, छोटा भाई विनायक और बड़ी बहन नित्या बेहाल हैं।
एक साथ दो शव देख परिजन रोने लगे
अचानक दो बहनों की मौत से घर में कोहराम मच गया। एक साथ दोनों के शव देख परिजन बेहाल हो गए। देर शाम तक स्थिति यह हो गई थी परिजनों की आंखों के आंसू सूख चुके थे। मां मुन्नी यही बड़बड़ाए जा रही थी कि चार बच्चों में छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में कहासुनी होती थी। सभी को डांट लगाकर चुप कराती थी।
जैतीपुर स्टेशन छोड़ने आया था पिता
दोनों बेटियों को स्कूल जाने के लिए पिता उन्हें बाइक से जैतीपुर स्टेशन छोडऩे आया था। उसे क्या पता था कि वह दोनों बेटियों को आखिरी बार छोड़ने आया है। इसके बाद कभी वह उन्हें नहीं छोड़ पाएगा। एक का शव उन्नाव और दूसरे का लखनऊ में होने से वह बेहाल हैं। उसे यह नहीं समझ आ रहा था कि वह क्या करें।