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UP: इस बीमार से जूझ रहे थे जायसवाल... कानपुर को बनाया फ्लाईओवरों का शहर; वार्ड उपाध्यक्ष से मंत्री तक सफर

Sat, 29 Nov 2025 01:46 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर

सार

पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भले ही अनंत यात्रा पर चले गए हों लेकिन उनकी शहर के विकास की सौंपी गईं विरासत हमेशा लोगों को जेहन में रहेंगी। तीन बार शहर के सांसद रहने के दौरान जायसवाल ने शहर के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में जाम से जकड़े शहर को आवागमन में राहत के लिए तीन फ्लाईओवर का निर्माण शुरू हुआ। औद्योगिक शहर की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए उन्होंने शहर में पहली बार उड़ान सेवा शुरू करवाई। चार ट्रेनों की भी शहर को सौगात दी।
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श्रीप्रकाश जायसवाल का निधन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का 81 वर्ष की अवस्था में शुक्रवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। दोपहर में उन्हें दिक्कत होने की वजह से पास के किदवईनगर स्थित एक नर्सिंग होम ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया। 
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वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह अपने पीछे पत्नी, एक बेटी और दो बेटों का परिवार छोड़कर गए हैं। उनका अंतिम संस्कार 30 को हो सकता है। उनके बड़े बेटे सिद्धार्थ कनाडा में हैं। उनके आने पर भी अंतिम संस्कार करने की चर्चा है।

25 सितंबर 1944 को जन्मे श्रीप्रकाश जायसवाल ने अपनी राजनीतिक यात्रा कांग्रेस के वार्ड उपाध्यक्ष के रूप में शुरू की थी। वार्ड के उपाध्यक्ष बनने के बाद उनकी पार्टी में सक्रियता को देखते हुए उन्हें 1989 में मेयर का टिकट दिया गया। उन्होंने जीत हासिल की। 
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मेयर रहने के दौरान भी वह काफी चर्चा में रहे। मेयर पद पर ढाई साल रहने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। फिर उन्हें शहर कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत किया गया।

46 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर पहली बार सांसद बने श्रीप्रकाश
इसके बाद पहली बार 1992 में उन्हें कैंट विधानसभा क्षेत्र से एमएलए चुनाव का कांग्रेस के टिकट पर प्रत्याशी बनाया गया था। इसमें वह हार गए थे। हारने के बावजूद 1998 में लोकसभा चुनाव उन्हें पार्टी ने प्रत्याशी बनाया। इसमें वह तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें मात्र 13 प्रतिशत वोट मिला था लेकिन अगले ही साल लोकसभा चुनाव फिर से हुआ और सभी को पछाड़कर श्रीप्रकाश 46 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर पहली बार सांसद बने।

 

उन्होंने भाजपा के जगतवीर सिंह द्रोण को हराया था। यही से वह राष्ट्रीय राजनीति में दाखिल हुए। सांसद रहते हुए पार्टी ने उन्हें 2002 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सौंपी। 2004 में फिर से लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के सत्यदेव पचौरी को हराकर जीत हासिल की। 
 

दूसरी बार केंद्र में कोयला मंत्री और सांख्यिकी मंत्री बने थे श्रीप्रकाश
इस दौरान केंद्र सरकार ने उन्हें गृह राज्यमंत्री बना दिया। इसी तरह 2009 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी सतीश महाना को हराकर सांसद बने। दूसरी बार वह केंद्र में कोयला मंत्री और सांख्यिकी मंत्री बने। 
 

इसके बाद वह लगातार दो बार फिर लोकसभा चुनाव में उतरे लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। 2019 के बाद अपनी बढ़ती उम्र के चलते उन्होंने कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से संन्यास ले किया। वह पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी लंबे समय तक रहे।

फेफड़े के संक्रमण से जूझ रहे थे श्रीप्रकाश जायसवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल फेफड़ों में संक्रमण की समस्या से जूझ रहे थे। उनका इलाज भी चल रहा था। शुक्रवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिवार के लोग उन्हें किदवईनगर स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि कार्डियक अरेस्ट हुआ था। इस पर उन्हें सीपीआर दिया गया लेकिन स्थिति नहीं सुधरी तो कार्डियोलॉजी के लिए रेफर कर दिया गया। 

अस्पताल के निदेशक डॉ. गौरव भार्गव ने बताया कि जब वे अस्पताल आए उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था। हमारे डॉक्टरों की टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया और सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की। उन्हें एडवांस पार्किंसन की समस्या भी थी। यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है और फेफड़ों में संक्रमण भी बढ़ गया था। 
 

उन्हें घर में ही कार्डियक अरेस्ट हुआ था। जब सीपीआर से आराम नहीं मिला तो उन्हें कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया गया। कॉर्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि परिजन ब्रॉड डेड लेकर आए थे। रास्ते में ही उनकी मौत हो चुकी थी। 

कानपुर को दी उड़ान, बनाया फ्लाईओवरों का शहर
पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल भले ही अनंत यात्रा पर चले गए हों लेकिन उनकी शहर के विकास की सौंपी गईं विरासत हमेशा लोगों को जेहन में रहेंगी। तीन बार शहर के सांसद रहने के दौरान जायसवाल ने शहर के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में जाम से जकड़े शहर को आवागमन में राहत के लिए तीन फ्लाईओवर का निर्माण शुरू हुआ। औद्योगिक शहर की कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए उन्होंने शहर में पहली बार उड़ान सेवा शुरू करवाई। चार ट्रेनों की भी शहर को सौगात दी।
 

श्रीप्रकाश जायसवाल के सांसद बनने के दौरान शहरवासी क्राॅसिंगों पर लगने वाले जाम से बेहाल थे। इस समस्या को दूर कराने के लिए उन्होंने शहर में फ्लाईओवरों के निर्माण की पहल की। इलाहाबाद क्रासिंग पर लगने वाले जाम को खत्म करने के लिए उनके कार्यकाल में 2007-08 में सीओडी पुल का शिलान्यास हुआ। 
 

वर्तमान में यह फ्लाईओवर चकेरी, रामादेवी की बड़ी आबादी को शहर से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। पुल बनने के बाद आवागमन की सुविधा बेहतर होने से श्यामनगर, सुजातगंज, कृष्णानगर समेत कई क्षेत्रों में विकास की गति तेज हुई है। 
 

इसी तरह गोल चौराहे पर लगने वाले जाम से निजात के लिए मेडिकल कॉलेज पुल और कैंट में इलाहाबाद क्राॅसिंग पर लगने वाले जाम से निजात के लिए उन्होंने शिव नारायण टंडन फ्लाईओवर की नींव रखी।
 

औद्योगिक शहर की अन्य शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी न होने की समस्या को जायसवाल ने समझा। उनके प्रयासों से शहर को चार नई ट्रेनों की सौगात मिली। एक सितंबर 2002 से कानपुर-नई दिल्ली के बीच श्रम शक्ति एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने कानपुर से मुंबई के बीच उद्योग नगरी ट्रेन का संचालन शुरू कराया। यह ट्रेन 15 जुलाई 2005 को चली। श्रम शक्ति एक्सप्रेस रात में चलती है। 
 

दिन में दिल्ली के लिए ट्रेन की मांग को देखते हुए जायसवाल ने 7 फरवरी 2010 को कानपुर-नई दिल्ली रिवर्स शताब्दी ट्रेन का संचालन शुरू कराया। उनके ही प्रयासों से शहर के वैष्णोदेवी की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कानपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस शुरू हुई। बाद में इसका नाम जाट एक्सप्रेस हो गया।
 

शहरवासियों को फ्लाइट लेने के लिए लखनऊ तक की दौड़ लगानी पड़ती थी। इस समस्या को दूर कराने की पहल भी जायसवाल ने की। उन्होंने 2007-08 के दौरान पहली बार चकेरी से डेक्कन एयरवेज की फ्लाइट शुरू कराई। चकेरी हवाई अड्डे को बरकरार रखने के लिए उन्होंने यहां सीआईएसएफ की तैनाती कराई। इससे पहले फ्लाइट के आने-जाने के दौरान पुलिस आ जाती थी और फिर हवाई अड्डा वीरान पड़ा रहता था। इसका स्वरूप न बिगड़े इसलिए उन्होंने सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए।
 
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शहरवासियों को वह दौर भी याद होगा जब बिजली जाने पर पता नहीं होता था कि अब कब आएगी। भविष्य में बिजली की आवश्यकता को महसूस करते हुए जायसवाल ने घाटमपुर और बिल्हौर पावर प्लांट निर्माण का प्रस्ताव केंद्र सरकार से समक्ष रखा था। कोयला मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने विभाग के जरिए शहर के कई पार्कों का सुंदरीकरण भी कराया।
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