कानपुर देहात/सरवनखेड़ा। छुट्टा मवेशियों से निजात दिलाने के लिए शासन ने हर गांव में अस्थायी आश्रय स्थल बनाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जिम्मेदार इनके संचालन में न केवल खानापूरी कर रहे हैं बल्कि अफसरों से लेकर सरकार तक को गुमराह कर रहे हैं।
सवनखेड़ा ब्लॉक की 51 ग्राम पंचायतों में 23 अस्थायी आश्रय स्थल संचालित दिखाए जा रहे हैं। शुक्रवार को जब इनमें से ही पांच गांवों में पड़ताल की गई तो वहां आश्रय स्थल मिले ही नहीं। इन आश्रय स्थल पर प्रति मवेशी के हिसाब से चारे पानी के लिए तीस रुपये प्रतिदिन दिए जा रहे हैं।
आश्रय स्थल व मवेशी न होने से यह धन कहां खर्च हो रहा है यह सवाल लोग उठा रहे हैं। वहीं गांव में घूम रहे छुट्टा मवेशियों से फसल बचाने के लिए किसान परेशान हो रहे हैं।
ब्लॉक के रिकार्ड में ग्राम पंचायत शाहजहापुर निनायां में अस्थायी आश्रय स्थल संचालित दिखाया गया है। मौके पर वहां कोई आश्रय स्थल संचालित नहीं है। गांव के बाहर झुंड बनाकर 50 से अधिक मवेशी बैठे नजर आए। महेश, राजेंद्र आदि किसानों ने बताया कि शाम होते ही मवेशियों के झुंड खेतों में पहुंच कर फसलें चौपट करते हैं। प्रधान के घर सिर्फ पांच गायें बंधी मिली। प्रधान ने बताया कि वह उनकी सेवा करते हैं।
बिल्टी गांव में अस्थायी आश्रय स्थल अभी बनाया ही नहीं गया है। फसल की रखवाली करने में किसानों ने सर्द रातें खेतों में गुजार दी। रामदास, राम सिंह आदि किसानों ने बताया कि गांव में आश्रय स्थल का कोई प्रबंध नहीं किया गया। इससे फसलें बचाना मुश्किल हो गया। कई किसानों की गेहूं की पूरी फसल मवेशियों ने चौपट कर दी। जिम्मेदारों ने आश्रय स्थल बनाने में ध्यान नहीं दिया।
भदेसा गांव में भी आश्रय स्थल नहीं बना मिला, जबकि कागजी आंकड़ों में यहां आश्रय स्थल का संचालन दिखाकर अफसरों को गुमराह किया गया है। गांव के किसान राम सिंह, मुकेश कुमार, गयादीन आदि ने बताया कि मवेशियों के झुंड फसलों का तबाह कर रहे हैं। रात भर खेतों में रुकना मजबूरी है। अगर आश्रय स्थल बना दिया जाता तो समस्या का निदान हो जाता।
अस्थायी आश्रय स्थल बनाने में लापरवाही करने वाले पंचायत सचिव चिह्नित किए जा रहे हैं। उन्हें नोटिस जारी किया जा रहा है। जवाब आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरवनखेड़ा ब्लॉक में भी छानबीन कराई जा रही है। - नमिता शरण, डीपीआरओ