इस बार नवरात्रि पर मां दुर्गा गज पर विराजमान होकर पृथ्वी पर आएंगी। 26 सितंबर से पांच अक्तूबर तक नवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा। गजवाहिनी माता सुख, शांति, समृद्धि की देवी कही जाती हैं। जो भक्त नवरात्रि में माता के नौ रूपों का पूजन करेंगे, उनकी सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होगा।
यह जानकारी आचार्य अमरेश मिश्रा ने दी। उन्होंने बताया कि श्रीवत्स योग में कलश स्थापना की जाएगी। यह योग 26 सितंबर को पूरे दिन रहेगा। नवें दिन माता मुर्गे पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हुए निज लोक के लिए प्रस्थान करेंगी। पं. केए दुबे पद्मेश ने बताया कि मां भगवती की प्रतिमा को उत्तर व पूर्व की दिशा में स्थापित करें। कच्ची मिट्टी में जौ व गेहूं मिलाकर उस पर कलश रखें। फिर गणेश गौरी का पूजन करें, नौ ग्रहों के पूजन व शांतिपाठ के बाद दीपक पूजन करें।
इन नौ दिनों में कम से कम 25 बार दुर्गा सरस्वती का पाठ करना चाहिए। घर में शांति के लिए सात बार पाठ करें। किसी कार्य को सफल बनाने के लिए 12 बार, किसी ग्रह को मजबूत करने के लिए 20 बार पाठ करें। पं. पद्मेश ने बताया कि रोजाना दो से नौ साल की कन्याओं को दान-पुण्य अवश्य करें। इससे मां भगवती की कृपा आप पर बनी रहेगी।