एक प्रोजेक्ट में नहीं किया गया है पालन
इसके अलावा कंपनी के कई प्रोजेक्ट में एफओसी अथवा सीसी जारी होने के बाद सप्लाई होने वाली इंवेंट्रीज के निर्माण में उपयोग में आए माल पर नियमानुसार आईटीसी रिवर्सल नहीं किया गया है। जांच में पता चला कि नई कर व्यवस्था में शुरू होने वाले प्रोजेक्ट पर नियमानुसार पांच प्रतिशत की करदेयता बिना आईटीसी के लाभ के साथ ली जा सकती है, लेकिन कंपनी ने एक प्रोजेक्ट में इसका पालन नहीं किया गया है।
पांच करोड़ 90 लाख का भुगतान कराया
अपर आयुक्त ग्रेड-1 शशांक शेखर मिश्रा ने बताया कि करचोरी का इनपुट मिला था। इसके बाद मुख्यालय व अन्य शहरों के जोनल अफसरों से कोऑर्डिनेट करके कार्रवाई की गई थी। जांच में मिली कमियों के आधार पर औद्योगिक घराने की दोनों कंपनियों से पांच करोड़ 90 लाख का भुगतान कराया गया। जांच टीमों में डिप्टी कमिश्नर विवेक उपाध्याय, संजीव शुक्ला, राजेश कुमार सिंह आदि रहे।