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सात करोड़ का घपला: अफसर खेल रहे जांच-जांच, वसूली में खाली होगी बहुत से अधिकारियों की जेब

Sat, 24 Jul 2021 04:01 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

फरवरी में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह ने करीब एक हजार आवेदकों को धन जारी करने के लिए सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार के समक्ष फाइल पेश की तो उन्होंने जांच के बाद मंजूरी देने की बात कही।
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घोटाला(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शासन की महत्वाकांक्षी शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। इसमें सात करोड़ 25 लाख रुपये का घपला हुआ है। कहने को तो यह पैसा अपात्रों के खातों में गया, लेकिन इसकी बंदरबांट कहां-कहां हुई, बस गिनेचुने लोग ही जानते हैं। यही वजह है कि अपात्रों से वसूली की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है। बताते हैं कि यदि अपात्रों से वसूली शुरू हो गई तो बहुत से अधिकारियों को भी अपनी जेब खाली करनी पड़ेगी।
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इसलिए इस मामले को सिर्फ लटकाए रखने की मंशा है। फरवरी में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह ने करीब एक हजार आवेदकों को धन जारी करने के लिए सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार के समक्ष फाइल पेश की तो उन्होंने जांच के बाद मंजूरी देने की बात कही। सीडीओ ने सिर्फ तीन आवेदनों की जांच जिला विकास अधिकारी से कराई। वे तीनों ही फर्जी निकले।

इस पर उन्होंने सभी आवेदकों की जांच कराई। पता चला कि सिर्फ सवा तीन सौ आवेदक ही पात्र हैं। बाकी सात सौ अपात्रों का भी धन जारी कराने का प्रयास किया गया। इस पर सीडीओ ने बीते दो वर्ष के दौरान जिन आवेदकों को लाभ दिया गया, उन सभी की जांच का फैसला लिया। करीब छह हजार आवेदकों के लिए 51 अफसर लगाए गए। इसमें 2533 अपात्र मिले।
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इनके खातों में सात करोड़ 25 लाख रुपया भेजा गया था। इस मामले में भी खेल हुआ। तमाम अधिकारियों ने घर बैठे रिपोर्ट लगा दी। इससे उनकी जांच में अपात्र पाए गए लोग अब पात्र निकल रहे हैं। यानी असली अपात्र अभी तक सामने नहीं आए। पूरे मामले में समाज कल्याण अधिकारी और 22 लेखपाल तो निलंबित हुए, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी बच गए।
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तत्कालीन नायब तहसीलदारों, तहसीलदार और एसडीएम पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे दो नायब तहसीलदार तो प्रमोशन तक पा गए। लेखपालों ने इस कार्रवाई का विरोध किया तो अब एक बार फिर से 41 अफसरों की टीम लगाकर 2533 अपात्रों की जांच कराई जा रही है। अब इनकी रिपोर्ट आने में महीना भर लगेगा। इस वजह से अपात्रों से वसूली की प्रक्रिया अटक गई। 

अपात्रों पर एफआईआर भी नहीं 
प्रशासन अपात्रों पर एफआईआर कराने का फैसला अभी तक नहीं ले पाया। 2533 में जितने पात्र मिले हैं, उन्हें छोड़कर बाकी पर एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। मगर ऐसा नहीं हो पा रहा। माना जा रहा है कि एफआईआर होने पर कमीशनबाजी का खेल खुल जाएगा।

गलत रिपोर्ट लगाने वालों पर कार्रवाई से बच रहे 
सवाल यह भी है कि 2533 अपात्रों में जो अब पात्र निकल रहे, उनकी जांच करने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? इनकी गलत रिपोर्ट पर लेखपाल निलंबित हुए हैं तो सच सामने आने के बाद इन पर कार्रवाई क्यों न हो।

दोबारा बनी जांच कमेटी 2533 आवेदनों की जांच कर रही है। इनमें जो जो कमियां मिलीं, उन पर कार्रवाई होगी। 
दीपक पाल, एसडीएम सदर

एक बार पता चल जाए कि वास्तव में कितने अपात्र हैं, उनके बाद ही वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। 
डॉ. महेंद्र कुमार, सीडीओ 

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