तत्कालीन नायब तहसीलदारों, तहसीलदार और एसडीएम पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे दो नायब तहसीलदार तो प्रमोशन तक पा गए। लेखपालों ने इस कार्रवाई का विरोध किया तो अब एक बार फिर से 41 अफसरों की टीम लगाकर 2533 अपात्रों की जांच कराई जा रही है। अब इनकी रिपोर्ट आने में महीना भर लगेगा। इस वजह से अपात्रों से वसूली की प्रक्रिया अटक गई।
अपात्रों पर एफआईआर भी नहीं
प्रशासन अपात्रों पर एफआईआर कराने का फैसला अभी तक नहीं ले पाया। 2533 में जितने पात्र मिले हैं, उन्हें छोड़कर बाकी पर एफआईआर की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। मगर ऐसा नहीं हो पा रहा। माना जा रहा है कि एफआईआर होने पर कमीशनबाजी का खेल खुल जाएगा।
गलत रिपोर्ट लगाने वालों पर कार्रवाई से बच रहे
सवाल यह भी है कि 2533 अपात्रों में जो अब पात्र निकल रहे, उनकी जांच करने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? इनकी गलत रिपोर्ट पर लेखपाल निलंबित हुए हैं तो सच सामने आने के बाद इन पर कार्रवाई क्यों न हो।
दोबारा बनी जांच कमेटी 2533 आवेदनों की जांच कर रही है। इनमें जो जो कमियां मिलीं, उन पर कार्रवाई होगी।
दीपक पाल, एसडीएम सदर
एक बार पता चल जाए कि वास्तव में कितने अपात्र हैं, उनके बाद ही वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।
डॉ. महेंद्र कुमार, सीडीओ