उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस (एनआईएमएचएएनएस) के सर्वे के हवाले से बताया कि आत्महत्या के मामलों में 90 फीसदी मनोरोगी होते हैं। इनमें 80 फीसदी अवसाद, 10 फीसदी सीजोफ्रेनिया, पांच फीसदी डिमेंशिया और 25 फीसदी शराब के लती होते हैं। सबसे अधिक आत्महत्या फांसी लगाकर की जाती है। इसके बाद जहर का इस्तेमाल होता है। समय से साइकोलॉजिकल फर्स्ट ऐड और साइको थेरेपी से लोगों को बचाया जा सकता है। अगर किसी को ऐसा विचार आता है तो वह इस संबंध में बात जरूर करे। इसके साथ ही डॉक्टर को जाकर दिखाए। फर्स्ट ऐड कोई भी दे सकता है।