गर्मी में पसीना बहने और वाष्पीकरण के कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। शरीर में डिहाइड्रेशन से खून गाढ़ा होता है और थक्का जम जाता है। थक्का हार्ट, ब्रेन के अलावा शरीर के किसी भी हिस्से में फंसकर रक्त का प्रवाह प्रभावित कर सकता है।
मस्तिष्क में फंसने से ब्रेन अटैक और हृदय में फंसने से हार्ट अटैक हो जाता है। इसी तरह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस विभाग में रोगी बढ़ रहे हैं। हैलट में औसत दो-तीन ब्रेन अटैक के रोगी आ रहे हैं। विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंह का कहना है कि न्यूरो रोगियों में हीट स्ट्रोक के कारण दिक्कत बढ़ी है।
इसके साथ ही ब्रेन अटैक के रोगी आ रहे हैं। अगर लगातार गर्मी ऐसी ही बनी रही तो और भी जटिलताएं हो सकती हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण रोगियों का ब्लड प्रेशर भी गिर रहा है। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में ऐसे रोगियों की संख्या 20 फीसदी बढ़ गई है। शरीर में अगर पानी की कमी न होने दी जाए तो इस प्रतिकूल परिस्थिति की जटिलताओं से बचा जा सकता है।
गर्मी के कारण मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। भीषण गर्मी से बचाव जरूरी है। खूब पानी पिएं। बाहर निकलें तो पानी की बोतल साथ लेकर निकलें और पानी पीते रहें। बिना जरूरत बाहर न निकलें। अंगोछा वगैरह लपेटे रहें। लापरवाही घातक हो सकती है।- डॉ. रिचा गिरि, उप प्राचार्य और मेडिसिन विभागाध्यक्ष