सावन माह के तीसरे सोमवार पर बांदा स्थित कालिंजर दुर्ग में भगवान नीलकंठ महादेव जी के दर्शन करने को भारी भीड़ उमड़ी। 800 फीट ऊपर पहाड़ियों पर मौजूद किला कालिंजर को कालजयी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इस किले का 18 पुराणों और चारों वेदों में जिक्र है।
इस किले में नीलकंठ महादेव मंदिर है। जहां समुद्र मंथन से निकले विष के रहस्य छिपे हुए हैं। कहा जाता है कि महादेव ने विषपान के बाद यहीं तपस्या कर विष के प्रभाव को खत्म कर काल की गति को मात दी थी। पांच फीट ऊंचा शिवलिंग विश्व का अनूठा और इकलौता है जिसमें विष पसीना बनकर रिसता रहता है।
भक्त शरीर में लगाते हैं पसीना
कालिंजर में अद्भुत शिवलिंग और इससे निकलने वाले पसीने का राज बेहद गहरा है। मान्यता है कि शिव ने समुद्र मंथन में जो विष पिया था उसका प्रभाव यहां दिखाई देता है और उसी प्रभाव की आस्था में सभी नतमस्तक हैं।
भगवान शिव के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंदिर में आते हैं और शिवलिंग से निकलने वाले पसीने को हाथों में लेकर अपने माथे और शरीर पर लगाते हैं। कहा जाता है कि इससे शरीर की तपिश कम होती है। साथ ही बुरे विचार और बुरी बलाओं का असर नहीं होता है।