कसबा स्थित सीएचसी में प्रसव के नाम पर उगाही के आरोप थमने का नाम नहीं ले
रहे हैं। शनिवार को फिर एक प्रसूता को कानपुर रेफर कर दिया गया। लेकिन,
डिलीवरी रूम के बाहर आते ही उसे बरामदे में प्रसव हो जाने से गुस्साए
परिजनों ने हंगामा कर दिया। एंबुलेंस चालक के साथ मारपीट की एवं अस्पताल
में तोड़फोड़ करने का भी प्रयास किया गया।
मथुरापुर गांव निवासी रणवीर
यादव की पत्नी निर्मला को दूसरा बच्चा होना था। शनिवार की दोपहर आशा बहू
शशि बाजपेई के साथ परिजनों ने उसे सीएचसी में भर्ती करवा दिया। ड्यूटी पर
नर्स रत्ना और शालिनी तैनात थीं। रणवीर यादव का आरोप है कि उससे प्रसव
कराने के नाम पर एक हजार रुपये की मांग की गई। जो उसने देने से मना कर
दिया। आरोप है कि इससे नाराज होकर नर्सों ने शाम तकरीबन 5 बजे के आसपास
निर्मला को कानपुर के लिए रेफर कर दिया। बताया कि जब उसने 108 एंबुलेंस को
फोन किया तो चालक विनय और अशोक ने कहा कि वह आधे घंटे के भीतर अस्पताल
पहुंच रहे हैं। लेकिन, घंटे भर बाद भी वह नहीं आए।
इधर, डिलीवरी रूम से
बाहर निकाले जाने के कुछ देर बाद ही निर्मला को सामान्य प्रसव हो गया।
उसने बच्ची को जन्म दिया। यह देख मौके पर मौजूद निर्मला का पति एवं अन्य
लोग भड़क गए। उन्होंने नर्सों को अपशब्द कहने के साथ ही वहां हंगामा करना
शुरू कर दिया। कुर्सी पलट दी एवं दरवाजों में धक्के मारे। इसी दौरान वहां
एंबुलेंस भी आ गई तो उन्होंने चालक विनय को पकड़कर धुन दिया। उसके शरीर में
चोटें आई हैं।
हंगामा बढ़ते देख अस्पताल में मौजूद कर्मचारी इधर-उधर
भाग निकले जबकि, पुलिस को भी सूचना दी गई। देर शाम थानाध्यक्ष अशोक कुमार
सिंह एवं आसपास की चौकियों का पुलिस बल सीएचसी पहुंच गया। पुलिस ने लोगों
को समझा-बुझाकर शांत करने के बाद निर्मला को एंबुलेंस से उसके घर भिजवा
दिया।
थानाध्यक्ष ने बताया कि रणवीर यादव और आशाबहू का पति उमेश बाजपेई
मित्र हैं। वह दोनों भी सीएचसी आए थे। आरोप है कि उन्होंने परिसर में साथ
बैठकर शराब पी और फिर अकारण वहां हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस आशाबहू के पति
उमेश बाजपेई की तलाश कर रही है।
सीएचसी
के अधीक्षक डा. अनुज दीक्षित ने बताया कि वह जरूरी काम से शहर आए हुए हैं।
सीएचसी पहुंचकर मामले की जानकारी करेंगे। डिलीवरी के नाम पर पैसे मांगे
जाने का आरोप गलत है। फिर भी जांच करने के बाद अधिकारियों को रिपोर्ट
भेजेंगे। मालूम हो कि बीते महीने (10 जनवरी) को भी सीएचसी में डिलीवरी के
बाद कई प्रसूताओं को बेड की जगह बर्फ सी ठंडी फर्श में लिटाने का मामला हुआ
था।