अफ्रीका, बेल्जियम में कोरोना का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन के मिलने के बाद सिस्टम को अलर्ट तो कर दिया गया है पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की लैब में आरटीपीसीआर जांचें एक चौथाई हो गई हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की कोविड लैब में जांच करने के लिए स्टाफ ही नहीं हैं।
आउटसोर्सिंग पर रखे गए स्टाफ को छह महीने से वेतन नहीं मिला है और अब शासन ने हटाने के निर्देश दे दिए हैं। बचे स्टाफ से बमुश्किल शहर में लिए जा रहे सैंपलों की ही जांच हो पाएगी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में दो कोविड लैब चल रही थीं।
इनमें 22 कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर थे। शासन ने इन्हें हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। लैब में अब 15 कर्मचारी बचे हैं, जिन पर कोरोना के सैंपलों की जांच की जिम्मेदारी है। मेडिकल कॉलेज में अभी तक मंडल के जिलों के अलावा लखनऊ मंडल के उन्नाव, प्रयागराज मंडल के फतेहपुर और कौशांबी आदि जिलों के सैंपलों की जांच हो रही थी।
इस लैब की क्षमता रोजाना दस हजार आरटीपीसीआर जांचों का था, जो स्टाफ कम होने से प्रतिदिन ढाई हजार के औसत पर आ गई है। इससे अधिक सैंपल लिए गए तो जांच नहीं हो पाएगी। इससे पेंडेंसी बढ़ती जाएगी। बहुत दिनों तक रखे रहने पर सैंपल खराब भी हो जाते हैं।
वहीं रिपोर्ट देर से आने पर रोगी का इलाज प्रभावित होता है। कोरोना की दूसरी लहर में बहुत से सैंपल की रिपोर्ट रोगियों के मरने के बाद आई थी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि जितना स्टाफ है, उसमें नगर की ही जांच हो पाएगी।