इटावा/चकरनगर। यमुना नदी में एक फिर से जलस्तर बढ़ने लगा है। शहर के शमशान घाट का मुख्य मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। वहीं, यमुना का जलस्तर बढ़ने से तहसील क्षेत्र चकरनगर के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। शाम छह बजे तक यमुना नदी चेतावनी निशान 120.92 मीटर को पार कर 121.66 मीटर पर पहुंच गई, जो खतरे के निशान से मात्र 26 सेंटीमीटर दूर है।
वहीं, शनिवार भोर तीन बजे से सुबह आठ बजे तक चंबल का जलस्तर थम गया था। जिसके बाद जलस्तर घटना शुरू हो गया। शाम छह बजे तक 120.64 मीटर से घटकर 120.49 मीटर पर पहुंच गया।
शहर के श्मशान घाट के लिए जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर लगभग पांच फीट तक पानी भर चुका है। इसके चलते शव यात्रा ले जाना अब संभव नहीं रहा। शहर के निचले हिस्से धूमनपुर्वा में यमुना का पानी घुसने लगा है। खेतों से लेकर गलियों और दुकानों तक सबकुछ जलमग्न होता जा रहा है। गांवों में लोग अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। चकरनगर के के ऐतिहासिक सिद्धनाथ मंदिर, भरेह–चकरपुरा मार्ग, निभी–बाबरपुर मार्ग, खीरीटी, ककरैया और रानियां गांव के रास्ते पानी भरने से पूरी तरह बंद रहे। गांवों के लोग बाढ़ के पानी में डूबकर आवश्यक सामान ला रहे हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा असर पशुपालकों पर पड़ा है। चारों ओर पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। महिलाएं और बुजुर्ग बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। ककरैया, खीरीटी, रानियां, हरौली, नीमाडाड़ा, गढ़ा कसदा और डिभोली गांव के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उन्हें हर समय यह डर सता रहा है कि कहीं रातोंरात जलस्तर के बढ़ने से उन्हें अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़े। ग्रामीणों ने प्रशासन से नाव, सूखा राशन और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि तीसरी बार बाढ़ की मार झेलना मुश्किल हो रहा है। अब उन्हें स्थायी समाधान की उम्मीद है।