काफी देर बाद बेटी बाहर आई तो उसने आपबीती सुनाई और किसी से कुछ कहने पर माता-पिता की हत्या कराने की धमकी दी। इस पर दंपती डर कर बेटी को वहीं छोड़ कर चले आए। बाद में उन्हें पता चला कि महाराज जी उनकी बेटी को अपने साथ हरिद्वार शंकराचार्य मार्ग स्थित भूपत वाला विश्वनाथ आश्रम ले गए। उत्तराखंड प्रशासन से मदद मांगी तो बेटी की मानसिक स्थिति शून्य होने की जानकारी मिली। कई बार बेटी को वापस करने की याचना की, लेकिन प्रखर महाराज के गुर्गों ने उनके साथ अभद्रता करते हुए भगा दिया।