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मिलिए समाजवादी पार्टी के तीन महीने के स्टार प्रचारक से, अखिलेश-डिंपल के लिए है जीत की चाभी

Sun, 19 Feb 2017 01:09 AM IST
अनूप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
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बच्चा खजांची
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कानपुर देहात के इस मासूम बच्चे और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच गहरा रिश्ता बन चुका है। यही वजह है कि अखिलेश की जुबां पर हर समय इस बच्चे का नाम रहता है। अखिलेश चुनावी जनसभा में हों या पत्रकारों से वार्ता कर रहे हों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए इस मासूम बच्चे के नाम का सहारा लेते अखिलेश नहीं थकते। आइये हम बतातें हैं कि मुख्यमंत्री अखिलेश और इस बच्चे की बीच ‘अंजाने रिश्ते की अजीब दास्तां’। 
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यूपी चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया ये बच्चा

बच्चा खजांची
बैंक की लाइन में जन्म लेने वाला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के मासूम खजांची नाथ को भले ही लोग न जानते हों लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव का यह बच्चा स्टार प्रचारक बन गया है। अखिलेश सिंह यादव हर जनसभा में उसका नाम लेकर प्रधानमंत्री मोदी के नोट बंदी फैसले को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इससे एक मासूम बच्चा यूपी के चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया है।
कानपुर देहात के झींझक ब्लाक के सरदारपुरवा जोगी डेरा गांव में रहने वाली  विकलांग गरीब भूमिहीन महिला सर्वेशा देवी पत्नी स्व. जसमेर नाथ झींझक की पंजाब नेशनल बैंक में 2 दिसंबर 2016 पैसा निकालने के लिए लाइन में लगी थी। तभी उसने लाइन में ही पुत्र को जन्म दिया था।

उसका नाम खजांची नाथ रख दिया गया

बच्चा खजांची
बैंक के अंदर बच्चे का जन्म होने के चलते उसका नाम खजांची नाथ रख दिया गया। इसकी जानकारी शासन तक होने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 24 दिसंबर को सर्वेशा को दो लाख रुपये की राहत चेक दी थी। फरवरी के प्रथम सप्ताह में अकबरपुर की जनसभा में आए मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह ने कहा कि झींझक के इस बच्चे का नाम खजांची नाथ लेकिन परिवार गरीब है। इसलिए हमने दो लाख रूपए देकर छोटा मोटा खजांची बना दिया। आगे भी मदद करेंगे। वहीं ग्राम प्रधान रामसिंह यादव के सहयोग से उसे लोहिया आवास भी मिल गया है। जिसकी छत पड़नी बाकी है।
 

मेहनत-मजदूरी कर बच्चे की मां पालती है परिवार

बच्चा खजांची
सर्वेशा के पति की मौत अगस्त 2016 में होने के बाद से वह अपने पुत्री प्रीती, पुत्र शिवा (8), धीरेंद्र (5), गगन (3) का पालन-पोषण कर रही है। जबकि खजांची गर्भ में था। वह गर्भवती होने के बाद भी मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी  लेकिन पुत्र खजांची के जन्म के बाद से तो उसकी किस्मत बदल गई। अब उसके खाते में दो लाख रुपया है और अपना पक्का मकान भी होगा। सर्वेशा का कहना है कि मुख्यमंत्री से मिली राहत धनराशि को वह बैंक में ही जमा रखेगी। मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण करती रहेगी।

सर्वेशा देवी का कहना है कि सास न होती तो मर जाती

बच्चा खजांची
खजांची नाथ की मां सर्वेशा का कहना है कि यदि उसके साथ बैंक में उसकी सास शशि न होती तो वह मर जाती। चूंकि, जब पेट में दर्द शुरू हुआ तो बैंक कर्मियों ने इसको बहाना समझा। लाइन में लगे अन्य लोग भी मजाक समझते रहे लेकिन लाइन में ही प्रसव शुरू हो गया। इसपर उसकी सास ने शॉल का कोना बनाकर प्रसव करवाया। उसकी सास प्रसव कराने के लिए प्रशिक्षित नहीं है लेकिन उसके सभी बच्चे घर में ही पैदा हुए। प्रसव की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। उसे कार में ले जाकर घर तक छोड़ा गया।  वह कहती है कि उसका गांव बैंक से 3 किमी दूर है। वह पैदल ही बैंक तक आई थी।
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सर्वेशा देवी के पति थे सपेरा

बच्चा खजांची
सर्वेशा देवी का परिवार बैना नाम की एक जनजाति में आता है जो कि देश में अति गरीब और पिछडे़ लोगों में जाना जाता है। यह लोग गांव के बाहर कच्चे व घासफूस के झोपड़े बनाकर सर्प पालने का काम करते हैं। सर्वेशा देवी के पति भी सपेरा थे लेकिन टीबी की बीमारी से उनकी मौत हो गई थी।
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