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सरकारी कार्यालयों की हकीकत, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हाजिर, अधिकारी नदारत

Tue, 28 Aug 2018 05:29 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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भीतरगांव सीएचसी
सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों व कर्मचारियों के निर्धारित समय से आने को लेकर उच्च स्तर से बार-बार दिए जाने वाले निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर नहीं है। हालात यह है कि सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटी मनमर्जी से चल रही है। कर्मचारी-अधिकारियों के निर्धारित समय पर कार्यालय आने व जाने के संबंध में मुख्यमंत्री ने भी पूर्व में कई बार निर्देश दे चुके हैं।

यूपी में कानपुर शहर के भीतरगांव ब्लाक के सरकारी कार्यालयों का सोमवार को "हमारे संवाददाता राघवेन्द्र सिंह यादव" ने हकीकत की पङताल की जैसा जो कुछ दिखा पेश है आंखो देखी एक रिपोर्ट... 
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भीतरगांव सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय मौर्या
स्थान- कार्यालय खण्ड शिक्षा अधिकारी भीतरगांव
समय- सोमवार सुबह 9:06 बजे


कसबे का खण्ड शिक्षा कार्यालय बंद है। प्राइवेट चतुर्थ कर्मचारी राजन कार्यालय के बाहर मौजूद है। कार्यालय खुलने का समय पूछने पर बताते हैं कि दस के पहले पहले कार्यालय खोल देते है। यह पूछने पर कि खण्ड शिक्षा अधिकारी व अन्य कर्मचारी कब तक आयेंगे, उसने कोई जवाब न देकर कार्यालय खोल दिया। परिसर मे ही उच्च प्राथमिक स्कूल मौजूद है।

स्कूल खुला है सहायक शिक्षिका सुनीता पाल कक्षा छै, सात व आठ के मौजूद केवल नौ बच्चो को एक ही कमरे मे बैठाये मिली। प्रधानाध्यापिका रामवंती हमारे सामने तय समय आठ बजे आने के बावजूद सवा नौ बजे स्कूल परिसर में आते दिखी। देर से आने का कारण पूछने पर पूरा ठीकरा निर्माणाधीन साढ भीतरगांव सड़क पर उतार कर कहती हैं कि टूटी सङक के कारण आठ बजे नहीं आ पायी।
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भीतरगांव बीआरसी कार्यालय
स्थान- सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भीतरगांव
समय- सोमवार सुबह 9:25 बजे


सीएचसी अस्पताल खुलने का समय सुबह आठ बजे का है संवाददाता को अस्पताल का मुख्य गेट खुला मिला। सीएचसी अधीक्षक डा. अजय मौर्या अपने आफिस में दवाओं का स्टाक रजिस्टर चेक करते मिले। डा. विनोद कटियार और फार्माशिस्ट सुनील सचान एक बुखार के मरीज को दवा देते मिले। लेकिन अन्य डाक्टर लेडीज डाक्टर नहीं मिली।

अधीक्षक डा. अजय मौर्या बताते हैं कि अस्पताल मे बायोमैट्रिक अटेंडेंस मशीन लगी है। महीना समाप्त के बाद सभी कर्मचारियों की अनुपस्थिती का फीडबैक सीएमओ कानपुर के पास भेजा जाता है जिससे कारण डाक्टरों व कर्मचारियों की रवैया मे सुधार हुआ है। 

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भीतरगांव ब्लॉक मुख्यालय के अंदर का नजारा
स्थान- खण्ड विकास कार्यालय परिसर।
समय - सोमवार सुबह 10:15


योगी सरकार का समय से कार्यालय पहुचने का फरमान भीतरगांव ब्लाक मे तैनात अधिकारियों कर्मचारियों पर बेअसर साबित हो रहा है। सोमवार को कार्यालय खुलने के समय के कुछ देर जब पड़ताल की गयी तो हकीकत खुलकर सामने आ गई। साढे दस बजे तक चतुर्थ कर्मचारियों ने ब्लाक के सभी कमरे खोल दिये थे लेकिन तीन चार कर्मचारियों को छोडकर सभी अधिकारी कर्मचारी अपने अपने कक्षों से नदारत थे। बीडीओ सौरभ बर्नवाल और एपीओ आनन्द शुक्ला का भी कोई अता पता नही था। पूछने पर पता चला यह रवैया आज का नही लंबे समय से चल रहा है।
 
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भीतरगांव ब्लॉक मुख्यालय
यहा तैनात लेखाकार देवेन्द्र दुबे, प्रमोद श्रीवास्तव और स्थापना लिपिक मयंक पटेल की कुर्सी 11 बजे तक खाली रहीं। इसी बीच लिपिक रामकिशोर दुबे पहुंच कर उपस्थती रजिस्टर मे हाजिरी चढाने लगे। जेई आर ई एस राजकुमार वर्मा भी नदारत मिले। एडीओ पंचायत अवधेश अवस्थी, लिपिक दिनेश कुशवाहा कार्यालय मे बैठे सफाई कर्मचारियों के रोस्टर रजिस्टर देखते मिले। एडीओ समाज कल्याण गजेन्द्र मिश्रा अपनी सीट में रजिस्टर के पन्ने उलटाते मिले।
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भीतरगांव सीडीपीअो कार्यालय
स्थान- बाल विकास पुष्टाहार कार्यालय भीतरगांव
समय- सोमवार सुबह 10:25 बजे


ब्लाक परिसर के बगल में बाल विकास पुष्टाहार कार्यालय खुला तो मिला लेकिन यहां तैनात सीडीपीओ लतिका सिंह सहित सभी सुपर वाइजरों की कुर्सियां खाली मिली। गावों मे खुले आंगनवड़ी केन्द्रों में पुष्टाहार की बोरियों को भेजने के लिये मजदूर बोरियों को उठाकर वाहन में रख रहे थे। एक कुत्ता कमरे के किनारे सोता मिला। मौके पर केवल सुपरवाइजर प्रवीण और कर्मचारी सूरज प्रसाद ही मिले।
इसी तरह कसबे का राजकीय पशुचिकित्सालय भी साढे दस बजे बंद मिला। जबकि राजकीय बीच भण्डार साढे दस बजे खुला मिला।


क्या कहते हैं जिम्मेदार
"सभी अधिकारियों को समय पर कार्यालय पहुंचने का निर्देश है। फरियादियों को सहूलियत देना पहली प्राथमिकता है। फिर भी कोई हीलाहवाली करता है तो निश्चिततौर पर अचानक निरीक्षण किया जायेगा। जिसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी महोदय को भेजी जायेगी।" धर्मेन्द्र कुमार उप जिलाधिकारी नरवल कानपुर
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