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Kanpur News: नगर आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी

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कानपुर। नगर निगम कार्यकारिणी के 12 में से 11 पार्षद सदस्यों ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी की है। सोमवार को कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। उन पर कार्यकारिणी और सदन से पास प्रस्तावों को निरस्त करने के आरोप लगाए गए हैं।
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वार्ड-65 के पार्षद व नगर निगम कार्यकारिणी के उपसभापति अभिनव शुक्ला (गोलू) की ओर से यह प्रस्ताव लाया जाएगा। इसमें आरोप है कि घर-घर कूड़ा उठान का टेंडर कंपनी को देने, मंगल भवन सहित अन्य समितियों को भंग कर पार्षदों को हटाया गया। हॉट मिक्स प्लांट के टेंडरों की जांच की समिति भी भंग कर दी गई। यह सभी निर्णय नगर निगम कार्यकारिणी या सदन से स्वीकृत थे जिन्हें निरस्त करने से पहले जानकारी दी जानी चाहिए थी लेकिन नगर आयुक्त ने ऐसा नहीं किया और फरमान जारी करते हुए कई समितियां भंग कर दीं। कूड़ा उठान का ठेका कंपनी को दे दिया।
आरोप लगाया कि नगर आयुक्त कार्यकारिणी में कुछ कहते हैं और बाहर आकर बयान पलट देते हैं। इनके विरोध में ही 12 में से 11 सदस्यों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें एक पार्षद नित्या बाजपेई के हस्ताक्षर नहीं हैं क्योंकि वह आ न सकीं। हालांकि, उनका भी समर्थन है और वह कार्यकारिणी में आएंगी। निंदा प्रस्ताव के लिए कार्यकारिणी के सात सदस्यों की सहमति चाहिए लेकिन हमारे साथ सभी 12 सदस्य हैं।
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शासन को भेजा जाएगा निंदा प्रस्ताव
उपसभापति ने बताया कि कार्यकारिणी से प्रस्ताव पास होने के बाद इसे नगर निगम सदन में रखा जाएगा। यहां से पास होने पर शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद शासन स्तर पर ही कार्रवाई होगी।


इनके हैं हस्ताक्षर
उप सभापति अभिनव शुक्ला, वार्ड-72 की वंदना शर्मा, 43 के राजकिशोर यादव, 25 के नीरज सिंह, 29 के जितेंद्र चौरसिया, 90 के आदर्श गुप्ता, 62 के भवानी शंकर राय, 87 के एसके यादव, 76 के कौशिक बाजपेई, कौशल कुमार, मधु यादव।

यह होता है निंदा प्रस्ताव
निंदा प्रस्ताव का मतलब नगर निगम के किसी अधिकारी, समिति या किसी विशिष्ट निर्णय के प्रति असहमति, असंतोष और आलोचना व्यक्त करना होता है। जब कार्यकारिणी में निंदा प्रस्ताव सर्वसम्मति या बहुमत से पारित हो जाता है, तो यह निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाता है। यह साबित करता है कि सदन या कार्यकारिणी, अधिकारियों के कामकाज से खुश नहीं है। हालांकि, निंदा प्रस्ताव पारित होने से किसी अधिकारी की नौकरी नहीं जाती और ना ही उसे तुरंत पद छोड़ना पड़ता है, लेकिन इससे अधिकारी पर गंभीर नैतिक और राजनीतिक दबाव बनता है। नगर निगम में पारित निंदा प्रस्ताव को आगे राज्य सरकार (शासन) को भेजा जा सकता है। इसके आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, तबादला या विभागीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। यदि किसी अधिकारी ने कार्यकारिणी या सदन को बिना विश्वास में लिए कोई नीतिगत फैसला लिया है, तो निंदा प्रस्ताव के जरिए उस फैसले को पलटने या निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की सकती है।


वर्जन
कार्यकारिणी को यह अधिकार है कि वह किसी भी मुद्दे पर सवाल कर सकती है लेकिन नगर आयुक्त हर बार एजेंडे की बात करते हैं। उन्हें जवाब तो देना होगा, चाहे तो वह समय मांग सकते हैं। इसी वजह से निंदा प्रस्ताव लाया जा रहा है। - अभिनव शुक्ला (गोलू), उपसभापति, नगर निगम कार्यकारिणी
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