डीसीपी ट्रैफिक/साउथ संकल्प शर्मा ने बताया कि आरोपियों ने वारदात कबूलते हुए बताया कि उनका दोस्त टीपू साहू हत्याकांड का साजिशकर्ता है। उसी ने इन दोनों के अलावा तौफीक के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। उसके बाद अंजाम दिया।
बचने का किया प्रयास, प्री-एक्टिवेटेड सिम का इस्तेमाल
त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग की वजह से हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। ऋषभ ने एक युवती की फोटो वायरल कर दी थी। इसी खुन्नस में टीपू ने उसकी हत्या की। पुलिस की जांच में सामने आया कि एक दिन पहले ही आरोपी किराये की स्कॉर्पियो कार लेकर शहर आ गए थे। घंटाघर स्थित एक होटल में ठहरे थे। कानपुर में दाखिल होने से पहले ही सभी ने फोन बंद कर लिए थे।
इस दौरान प्रीएक्टिवेटेड सिम को नौबस्ता में रिचार्ज कराया। उसी नंबर से अमित ने ऋषभ को फोन कर पार्टी करने की बात कहकर बुलाया था। हत्याकांड को अंजाम देने के बाद घाटमपुर में जाकर अपने मोबाइल ऑन किए।
सर्विलांस और गाड़ी नंबर से खुला खेल
फुटेज से गाड़ी नंबर पुलिस को मिल गया था, जिससे पता चला कि आरोपियों ने कार ली थी। वहीं सर्विलांस की मदद से एक-एक कर सभी आरोपियों के नंबर पुलिस ने जुटा लिए। जो एक साथ बंद हुए। एक साथ ऑन हुए थे। इन्हीं सभी तथ्यों से हत्याकांड की परतें खुलती गईं।