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हत्या की गुत्थी सुलझी: एक महीने पहले रची थी साजिश, फिर किया दोस्त का मर्डर,  पुलिस ने दो आरोपियों को भेजा जेल

Tue, 12 Apr 2022 07:17 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में दरोगा राकेश कुमार के 22 वर्षीय बेटे ऋषभ की हत्या में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, दो अन्य की तलाश जारी है।
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ऋषभ अपहरण कर हत्या करने के आरोपी अभय और अमित - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में दरोगा के 22 वर्षीय बेटे ऋषभ उर्फ रोमी के हत्याकांड का पुलिस ने सोमवार को राजफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। हत्याकांड को अंजाम देने वाला जिम संचालक व एक और आरोपी फरार हैं, जिसकी तलाश में पुलिस लगी हुई है।

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वारदात में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो कार भी बरामद कर ली गई है। एक महीने पहले हत्याकांड की साजिश रची गई थी। वारदात के वक्त सभी ने मोबाइल बंद कर दिए थे। फिर भी वह सर्विलांस व सीसीटीवी के जाल में फंस गए। 
बता दें कि बर्रा निवासी ऋषभ का सात अप्रैल को अपहरण हो गया था। आठ अप्रैल को सचेंडी नहर में उसका शव मिला था। पुलिस ने महोबा के सुभाष नगर निवासी अभय प्रताप सिंह व गांधी नगर महोबा के रहने वाले अमित यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

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डीसीपी ट्रैफिक/साउथ संकल्प शर्मा ने बताया कि आरोपियों ने वारदात कबूलते हुए बताया कि उनका दोस्त टीपू साहू हत्याकांड का साजिशकर्ता है। उसी ने इन दोनों के अलावा तौफीक के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। उसके बाद अंजाम दिया। 

बचने का किया प्रयास, प्री-एक्टिवेटेड सिम का इस्तेमाल
त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग की वजह से हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। ऋषभ ने एक युवती की फोटो वायरल कर दी थी। इसी खुन्नस में टीपू ने उसकी हत्या की। पुलिस की जांच में सामने आया कि एक दिन पहले ही आरोपी किराये की स्कॉर्पियो कार लेकर शहर आ गए थे। घंटाघर स्थित एक होटल में ठहरे थे। कानपुर में दाखिल होने से पहले ही सभी ने फोन बंद कर लिए थे।  
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इस दौरान प्रीएक्टिवेटेड सिम को नौबस्ता में रिचार्ज कराया। उसी नंबर से अमित ने ऋषभ को फोन कर पार्टी करने की बात कहकर बुलाया था। हत्याकांड को अंजाम देने के बाद घाटमपुर में जाकर अपने मोबाइल ऑन किए।

सर्विलांस और गाड़ी नंबर से खुला खेल
फुटेज से गाड़ी नंबर पुलिस को मिल गया था, जिससे पता चला कि आरोपियों ने कार ली थी। वहीं सर्विलांस की मदद से एक-एक कर सभी आरोपियों के नंबर पुलिस ने जुटा लिए। जो एक साथ बंद हुए। एक साथ ऑन हुए थे। इन्हीं सभी तथ्यों से हत्याकांड की परतें खुलती गईं।
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