कदौरा। कस्बे में शनिवार रात बेतवा का जलस्तर बढ़ने पर एसडीएम कौशल कुमार के निर्देश पर रविवार सुबह राजस्व व पुलिस टीम ने क्षेत्र के पथरेहटा, क्योटरा, साहू का डेरा व बसरेही गांव में पहुंच कर ग्रामीणों को तत्काल प्रभाव से हटवा कर सुरक्षित ठिकानों पर भिजवाया। साथ ही उनके खाने पीने का इंतजाम करवाया। लेखपाल रामजी सिंह ने बताया कि बसरेही पथरेहटा, क्योटरा, साहू का डेरा गांव के कुछ ग्रामीणों के मकान बाढ़ की जद में आए है, जिनको सुरक्षित ठिकानों पर भिजवा दिया है। जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए डुगडुगी पिटवा दी है। कर्मचारी लगातार नजर बनाए है। किसी कोे बेतवा किनारे नहीं जाने दिया जा रहा है। एसडीएम कौशल कुमार ने बताया कि नोडल अधिकारी सहित अधिकारियों को निर्देश दिए है, कि वह लगातार कैंप लगा कर स्थिति पर नजर रखे। इस मौके पर उपनिरीक्षक बाबूलाल, प्रधान सतीश राजपूत, सेवाराम सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
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बीहड़ पट्टी में आई बाढ़, गांवों की स्थिति खराब
रामपुरा। बीहड़ क्षेत्र के गांवों में सिंध, यमुना नदं में आई बाढ़ ने नादिया पार के गांवों में हाहाकार मचा रखा है। जिससे इन गांवों में बाशिंदों का जनजीवन अस्त व्यस्त हैं। सेना के मोर्चा संभालने के बाद कुछ हद तक हालात सुधरे हैं। रविवार को सुबह से ही रेस्क्यू ऑपरेशन सेना द्वारा शुरू कर दिया गया। कई गांवों के निचले इलाकों को पूर्णता खाली करा लिया गया है। प्रशासन द्रारा राशन सामग्री का भी वितरण किया जा रहा हैं। सेना के जवान लगातार लोगों की मदद कर रहे है। विधायक मूलचन्द निरंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि बाढ़ से प्रभावित गांवों का चार्ट बनाकर हेलीकॉप्टर की टीम को दे दिया है। प्रशासन की टीम को भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में भेजा जा रहा है। सभी पाइंट पर लाल झंडे लगाये गए है। ताकि हेलिकॉप्टर से सही जगह राशन सामग्री उतारी जा सके।
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कुछ गांवों में पहुंचा राशन, तो मदद की दरकार
रामपुरा। हेलीकाप्टर से सामग्री वितरण में कहीं राशन पहुंचा तो कही ग्रामीण मायूस लौटे। डिकौली जागीर में ग्रामीणों को राशन सामग्री नहीं मिल सकी। ग्रामीण जयदेवी, साधना देवी, वीरसिंह, सर्वेश कुमार, बाबूराम आदि कई ग्रामीणों को राशन सामग्री नहीं मिल पाई। ग्रामीण मायूस होकर खाली हाथ वापस लौटे। गांव की आवादी 1800 के लगभग हैं। बिहौढ़, जाखेता दो ऐसे गांव हैं, जिनमें पांच दिनों से कोई राशन सामग्री नहीं भेजी गई। ग्रामीणों में बीमारी भी हो रही हैं। इससे ग्रामीण परेशान हो रहे है। बिहौड़, जाखेता में ग्रामीण भुखमरी के कगार पर आ गया हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन मदद के लिए ढोल पिटता घूम रहा हैं। बिहौढ़, जखेता इन दोनों गांव की स्थिति बाद से बत्तर हो चुकी हैं। प्रशासन को इन ग्रामीणों की सुध लेने चाहिए। अभीतक कोई सरकारी अधिकारी इन गांवों में नहीं पहुंचा।
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खाना बनाने के लिए दिए जाए गैस सिलेंडर
बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण महेन्द्र कुमार, उमेश सिंह, देवेन्द्र यादव आदि ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास खाना बनाने के लिए सारा सामान गीला हो चुका हैं। लकड़ियां आदि गीली हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की हैं कि उनको गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाए। घर पर रखे सिलेंडर खाली हो चुके हैं। गैस सिलेंडर उपलब्ध होने पर छोटे छोटे बच्चों को कुछ बनाकर खिला सकें।
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दिन भर स्टीमर की आवाज का इंतजार करते है मासूम
गांव में बाढ़ का पानी आने के कारण ग्रामीण गांव के किनारे ऊचे टीलों पर रहने हो मजबूर है। अपने ट्रैक्टरों की ट्रॉलियों में अनाज को पन्नी से ढक कर रखे हैं। सेना द्वारा राशन सामग्री लाते देख गांव के बच्चे स्टीमरों की ओर भागते हैं। जब स्टीमर वहां से दूसरे गांव की ओर जाता हैं, तो मायूस होकर फिर से ऊंचे स्थानों पर पहुंच जाते हैं।
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केन्द्रीय राज्य मंत्री के प्रतिनिधि भी पहुंचे
कालपी। यमुना एवं बेतवा नदियों में आई प्रलयकारी बाढ़ की चपेट में आए प्रभावित क्षेत्रों का सांसद एवं केंद्रीय उद्योग राज्य मंत्री भानु प्रताप वर्मा के प्रतिनिधि रविकांत द्विवेदी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जायजा लिया। प्रभावित परिवारों से मुलाकात करके उन्होंने भरोसा दिलाया कि बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र का सर्वे कर के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से भी पर्याप्त मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
रविवार की दोपहर को केंद्रीय मंत्री के प्रतिनिधि रवि कांत द्विवेदी, मंत्री पुत्र मनोज भान सिंह, नगर पालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि नवीन गुप्ता, सहकारी बैंक कालपी के अध्यक्ष राजन सिंह चौहान, श्रीकृष्ण गौतम आदि ने यमुना नदी के तटवर्ती बाढ़ ग्रस्त मोहल्लों आलमपुर, रामगंज, तरीबुल्दा आदि का निरीक्षण किया।