कानपुर देहात जिले के सट्टी थाने में लघु शंका के लिए जाता मुख्तार अंसारी। संवाद
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कानपुर देहात। पंजाब की रोपड़ जेल से बांदा जाने के दौरान मंगलवार की रात जिले के सट्टी थाने के बाहर मुख्तार अंसारी का काफिला रुका। बाकी गाड़ियां तो सड़क पर खड़ी रहीं एंबुलेंस सट्टी थाने के बरामदे तक पहुंची। एंबुलेंस से उतरकर बिना व्हील चेयर के मुख्तार शौचालय तक पहुंचा। वहां लघु शंका करने के बाद बरामदे में पड़ी कुर्सी में करीब दस मिनट बैठा रहा। अफसरों का इशारा मिलते ही वह थानेदार से शुक्रिया दोस्त कहकर एंबुलेंस में सवार हो गया।
मुख्तार अंसारी के बांदा जेल जाने के दौरान जिले में पुलिस अलर्ट थी। जैसे ही काफिला भोगनीपुर से घाटमपुर रोड पर मुड़ा तभी इस रूट के थानों को अलर्ट कर दिया गया। सट्टी के पास मुख्तार ने लघु शंका करने के लिए गाड़ी रोकने की बात कही। एंबुलेंस में मौजूद सुरक्षा कर्मियों को उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। इसकी जानकारी पर सुरक्षा के मद्देनजर एसपी केशव कुमार चौधरी ने काफिला सट्टी थाने के बाहर रोकने को कहा। वहां बाकी गाड़ियां तो सड़क पर खड़ी रहीं। जिस एंबुलेंस में मुख्तार सवार था उसे थाने के अंदर भेजा गया। शौचालय से करीब 20 मीटर दूर एंबुलेंस खड़ी हो गई। मुख्तार एंबुलेंस से उतर कर शौचालय तक बिना व्हील चेयर के गया। लघु शंका करने के बाद आराम से निकल कर वह बरामदे में पड़ी कुर्सी में बैठ गया। करीब दस मिनट तक बैठा रहा। बरामदे में मुख्तार के साथ पंजाब से आए पुलिस जवान व सट्टी एसओ कपिल दुबे मौजूद थे। इस बीच बाहर से संकेत मिलते ही अफसर उसे गाड़ी बैठाने के लिए आया। इशारा समझते ही वह खुद उठकर एंबुलेंस में जाकर बैठ गया। इस दौरान उसने एसओ से शुक्रिया दोस्त बोला। इसके बाद काफिला घाटमपुर होते हुए बांदा के लिए रवाना हो गया। एसओ कपिल दुबे ने बताया कि लघु शंका करने के बाद करीब दस मिनट मुख्तार थाने में बैठा था।
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पांच मिनट में पूरी कर ली गई व्यवस्था
- जैसे ही मुख्तार अंसारी ने लघु शंका करने के लिए रुकने की बात कही तो अफसरों ने सट्टी थाने में गाड़ी रोकने का फैसला लिया। वहां तत्काल सट्टी एसओ को निर्देश दिए गए कि ऐसे शौचालय में उसे ले जाएं जहां अंदर से दरवाजा बंद करने के बाद भी आसानी से खोला जा सके। एसओ ने तत्काल ऐसे ही शौचालय में उसके जाने की व्यवस्था की। हर कदम पर पुलिस ने पूरे एहतियात बरते।