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सफलता: पीएम मोदी ने की 12 साल की इस बच्ची की तारीफ, जानिए ऐसा क्या कारनामा किया है कानपुर की काव्या ने

Tue, 17 Aug 2021 06:37 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा दिनेश प्रताप सिंह ‘गौरव’, अमर उजाला, कानपुर

सार

काव्या ने अपने लेख में घाटमपुर क्षेत्र के एक ऐसे मंदिर का जिक्र किया है, जहां आजादी से ठीक एक दिन पहले अंग्रेजों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद इन सभी अंग्रेजों को मार गिराया गया था।
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परिजनों के साथ काव्या - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आजादी के आंदोलन के अनछुए पहलुओं को अपने लेख से उजागर करने वाली आठवीं की छात्रा काव्या ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे मेल कर तारीफ की है। 12 साल की काव्या ने ऑनलाइन हुई इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया है। कुल 75 ऐसे प्रतिभागियों का चयन हुआ है, जिनके लेखों में आजादी से जुड़े आंदोलनों की नई जानकारियां सामने आई हैं।
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काव्या ने अपने लेख में घाटमपुर क्षेत्र के एक ऐसे मंदिर का जिक्र किया है, जहां आजादी से ठीक एक दिन पहले अंग्रेजों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद इन सभी अंग्रेजों को मार गिराया गया था। भारत सरकार व एनबीटी (नेशनल बुक्स ट्रस्ट) ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर अमृत महोत्सव मनाया है। इसमें 30 वर्ष तक की आयु के लेखकों के लिए ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता कराई गई।

इसमें आजादी के आंदोलनों के ऐसे स्थान और व्यक्ति के बारे में लेख लिखना था, जिसके बारे में लोग न जानते हों और इसकी जानकारी इंटरनेट पर भी न हो। इस प्रतियोगिता में विदेश में रहने वाले भारतीयों को भी शामिल होने का मौका दिया गया। 75वें स्वतंत्रता दिवस होने की वजह से 75 प्रतिभागियों को चुना गया है, जो अनछुए पहलुओं को उजागर करने में कामयाब रहे।
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काव्या - फोटो : amar ujala
मूल रूप से जवाहर नगर पश्चिमी घाटमपुर की रहने वाली और नवोदय विद्यालय जलालपुर नागिन (कानपुर देहात) की छात्रा काव्या ने प्रथम स्थान हासिल किया है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने खुद छात्रा को मेल कर बधाई दी है। कहा कि विश्वास नहीं होता कि आजादी पर 12 साल की बेटी ने ऐसा लेख लिखा। बहुत कम उम्र में आजादी आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। 

आजादी की पूर्व संध्या पर एक मंदिर में हुई थी जंग
छात्रा ने अपने लेख में घाटमपुर क्षेत्र के एक मंदिर का जिक्र किया है। छात्रा के लेख के मुताबिक स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या (14 अगस्त 1947) पर देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था। भारतीय अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई खत्म मान चुके थे। लेख के मुताबिक इसी बीच घाटमपुर क्षेत्र के जंगल में स्थित प्राचीन मंदिर में अंग्रेजों के छिपे होने की भनक लगी।

अंग्रेजों ने खुद को घिरा देख आंदोलनकारियों पर हमला कर दिया। इसमें कई भारतीय शहीद हुए और सभी अंग्रेज भी मारे गए। लेख के अनुसार इस घटनाक्रम को उस वक्त इसलिए छिपाया गया कि आजादी के जश्न में कोई व्यवधान न पड़े। लोगों में निराशा का भाव न पैदा हो। इसके बाद मंदिर में हुआ आंदोलन गुम हो गया। छात्रा के लेख को एनबीटी व और भारत सरकार के चयन बोर्ड ने पसंद किया। 
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