इस तरह करें श्राद्ध
- पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंस के अध्यक्ष केए दुबे पद्मेश के अनुसार 10 से 25 सितंबर के बीच तर्पण का विधान है। इस बीच श्राद्ध कर माता-पिता के ऋण से मुक्त हो सकते हैं। इस दौरान एक बर्तन में जल, तिल, जौ, कुश व फूल लेकर तर्पण करना चाहिए।
- धूनी ध्यान केंद्र के प्रमुख आचार्य अमरेश मिश्र ने बताया कि तर्पण चार तरीके से किया जाता है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश के लिए, देवताओं के लिए, ऋषियों और पितरों के लिए। पिंड दान आटे से या फिर पके हुए चावल से किया जाता है।
- पंडित मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि पितरों की जिस तिथि में मृत्यु हुई हो, उसी तिथि को श्राद्ध करना चाहिए। तिथि ज्ञात न होने पर अश्विन अमावस्या का दिन श्राद्ध कर्म के लिए श्रेष्ठ होता है क्योंकि इस दिन सर्व पितृ श्राद्ध योग माना जाता है।
- पंडित पवन तिवारी के अनुसार श्राद्ध पूजा दोपहर के समय आरंभ करनी चाहिए। योग्य ब्राह्मण की सहायता से मंत्रोच्चारण करें व पूजा के पश्चात जल से तर्पण करें।
- पंडित गौरव तिवारी ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में कोई नया कार्य, नई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए। यह पितरों को याद करके शोक मनाने का समय होता है। ऐसा करने से आपका ध्यान पितरों से हट जाता है।