बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षामित्रों को जल्द ही पीएफ का लाभ मिलेगा। इस संबंध में श्रम मंत्रालय और केंद्रीय भविष्य निधि संगठन की कई चरणों में वार्ता हो चुकी है। शहर में करीब तीन हजार शिक्षामित्र हैं, जबकि पूरे प्रदेश में इनकी संख्या 1.72 लाख से अधिक है। क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक शिक्षामित्रों को मौजूदा समय में प्रदेश सरकार प्रतिमाह मानदेय देती है।
शिक्षामित्रों को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने इस दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। श्रम मंत्रालय और विभाग के बीच कई स्तर पर चर्चा हो चुकी है। अब यह तय होना है कि शिक्षामित्रों को किस तरह पीएफ की सामाजिक सुरक्षा दी जाए। शिक्षामित्रों को मानदेय सरकार देती है, जबकि पीएफ योजना में 12 फीसदी हिस्सेदारी नियोक्ता और 12 फीसदी हिस्सेदारी कर्मचारी की होती है। ऐसे में पीएफ का (अंशदान) हिस्सा शिक्षामित्रों के मानदेय से काटा जाएगा। इंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड स्टाफ यूनियन के महामंत्री राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि शिक्षामित्रों को पीएफ के दायरे में लाने से उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिल सकेगी। इस दिशा में संगठन और श्रम मंत्रालय कार्य कर रहा है।