फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इत्र कारोबारी पीयूष मामला: डीजीजीआई ने ठुकराई टैक्स जमा करने की पेशकश, ब्याज व जुर्माना अदा करने को कोर्ट में दी थी अर्जी

Wed, 30 Mar 2022 01:22 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

पीयूष के खिलाफ आर्थिक अपराध का मामला चल रहा है। 22 फरवरी को आरोप पत्र भी कोर्ट में दाखिल कर दिया गया है। जिसे कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया है। कोर्ट में आरोप तय होने हैं। इस स्थिति में रुपये जमा करने की पेशकश करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
विज्ञापन
पीयूष जैन - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इत्र कारोबारी पीयूष जैन की 35.38 करोड़ रुपये टैक्स, ब्याज और जुर्माना अदा करने की पेशकश डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद जोन की ओर से ठुकरा दी गई है। पीयूष की ओर से प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दी गई अर्जी पर डीजीजीआई की ओर से आपत्ति दाखिल की गई।
विज्ञापन


सुनवाई के लिए कोर्ट ने 11 अप्रैल की तारीख नियत कर दी है। वहीं डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) की अर्जी पर कोर्ट ने पीयूष की न्यायिक हिरासत अवधि भी 11 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। पिछले तीन माह से जेल में बंद पीयूष के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में अर्जी देकर कहा गया था कि पीयूष की जमानत अर्जी पर डीजीजीआई की ओर से दी गई आपत्ति में पीयूष पर 35.38 करोड़ रुपये टैक्स चोरी का आरोप लगाया गया था।

कोर्ट ने भी टैक्स चोरी के आरोप में पीयूष की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। डीजीजीआई की आपत्ति के आधार पर पीयूष एसबीआई में जमा अपने धन पर 35.38 करोड़ रुपये टैक्स, ब्याज और जुर्माना भी अदा करने को तैयार है। पीयूष ने कोर्ट से रुपये अदा करने की अनुमति मांगी थी साथ ही डीजीजीआई से अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की मांग भी की थी।
विज्ञापन


वहीं विशेष लोक अभियोजक अंब्रीष टंडन ने कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि पीयूष ने खुद माना है कि सीज की गई धनराशि उसने अवैध तरीके से माल की बिक्री कर जीएसटी चोरी करके इकट्ठा की थी। कर की गणना पीयूष ने अपने तरीके से की है। डीजीजीआई अभी मामले की जांच कर रहा है।

 
विज्ञापन

पीयूष के खिलाफ आर्थिक अपराध का मामला चल रहा है। 22 फरवरी को आरोप पत्र भी कोर्ट में दाखिल कर दिया गया है। जिसे कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया है। कोर्ट में आरोप तय होने हैं। इस स्थिति में रुपये जमा करने की पेशकश करने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

वहीं सोना तस्करी के मामले में डीआरआई लखनऊ की ओर से विवेचक बद्रीष राय ने जांच जारी होने का हवाला देते हुए पीयूष की न्यायिक हिरासत अवधि बढ़ाने की कोर्ट से मांग की। पीयूष की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जेल से पेशी हुई। कोर्ट ने हिरासत अवधि 11 अप्रैल तक बढ़ा दी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें