इत्र कारोबारी पीयूष जैन की 35.38 करोड़ रुपये टैक्स, ब्याज और जुर्माना अदा करने की पेशकश डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) अहमदाबाद जोन की ओर से ठुकरा दी गई है। पीयूष की ओर से प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दी गई अर्जी पर डीजीजीआई की ओर से आपत्ति दाखिल की गई।
सुनवाई के लिए कोर्ट ने 11 अप्रैल की तारीख नियत कर दी है। वहीं डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) की अर्जी पर कोर्ट ने पीयूष की न्यायिक हिरासत अवधि भी 11 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दी है। पिछले तीन माह से जेल में बंद पीयूष के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में अर्जी देकर कहा गया था कि पीयूष की जमानत अर्जी पर डीजीजीआई की ओर से दी गई आपत्ति में पीयूष पर 35.38 करोड़ रुपये टैक्स चोरी का आरोप लगाया गया था।
कोर्ट ने भी टैक्स चोरी के आरोप में पीयूष की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। डीजीजीआई की आपत्ति के आधार पर पीयूष एसबीआई में जमा अपने धन पर 35.38 करोड़ रुपये टैक्स, ब्याज और जुर्माना भी अदा करने को तैयार है। पीयूष ने कोर्ट से रुपये अदा करने की अनुमति मांगी थी साथ ही डीजीजीआई से अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की मांग भी की थी।
वहीं विशेष लोक अभियोजक अंब्रीष टंडन ने कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि पीयूष ने खुद माना है कि सीज की गई धनराशि उसने अवैध तरीके से माल की बिक्री कर जीएसटी चोरी करके इकट्ठा की थी। कर की गणना पीयूष ने अपने तरीके से की है। डीजीजीआई अभी मामले की जांच कर रहा है।