कानपुर देहात। जिले में संचालित हो रही 108,102 एंबुलेंस सेवा में फर्जी फेरे लगाने का मामला सामने आया था। मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य निदेशक ने एंबुलेंस की ओर से लगाए गए फर्जी फेरों पर तीन गुना अर्थदंड लगाया है। वहीं नवंबर माह की जांच रिपोर्ट न मिलने पर संस्था का नवंबर माह का भुगतान भी रोका गया है।
जिले में मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए संचालित एंबुलेंस सेवा में सरवनखेड़ा ब्लॉक में एक ही नंबर से 42 बार एंबुलेंस बुलाया जाना पाया गया था। वहीं अकबरपुर के आंबेडकर नगर निवासी ओम प्रकाश पाठक ने 22 अक्तूबर 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि जिले में 102 एंबुलेंस के फेरे बढ़ाने के लिए फर्जी तरीके से सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। शिकायत को संज्ञान में लेकर स्वास्थ्य निदेशक ने सीएमओ डॉ. एके सिंह को एंबुलेंस सेवा की ओर से अक्तूबर व नवंबर माह में लगाए गए फेरों की सभी स्वास्थ्य इकाइयों से दोबारा सत्यापन करवाने के निर्देश दिए थे।
सीएमओ की ओर से करवाई गई जांच में अक्तूबर माह में एंबुलेंस के 15 फेरे गलत पाए गए थे। वहीं, नवंबर माह की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय की ओर से अभी उच्चाधिकारियों को नहीं दी जा सकी है। फर्जी फेरों का मामला सामने आने पर स्वास्थ्य निदेशक की ओर से कार्यदायी संस्था का अक्तूबर माह में 15 फर्जी ट्रिप के हिसाब से तीन गुना धनराशि 41460 रुपये की कटौती की है। साथ ही नवंबर माह में एंबुलेंस की ओर से लगाए गए कुल 11997 फेरों की कुल धनराशि 11290906 रुपये का भुगतान रोका गया है। इस धनराशि को सीएमओ कार्यालय से जांच आख्या देने के बाद जारी किया जाएगा।
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वर्जन
जिले में संचालित एंबुलेंस सेवा का भुगतान संबंधित चिकित्सा ईकाई से सत्यापन के बाद सीएमओ की ओर से भेजी गई रिपोर्ट पर किया जाता है। फेरे गलत मिलने पर कार्यदायी संस्था को प्रति फेरे की धनराशि का तीन गुना अर्थदंड लगाया जाता है। अक्तूबर माह में मिले फर्जी फेरों पर कार्यदायी संस्था पर अर्थदंड लगाया गया है। जबकि नवंबर माह का वेतन रोका गया है। जल्द ही नवंबर माह की जांच आख्या को उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा। - डॉ. आदित्य सचान, डिप्टी सीएमओ, नोडल एंबुलेंस सेवा