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एंबुलेंसों का चक्काजाम जारी, इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित

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कानपुर देहात। जिले में दो दिनों से एंबुलेंसों का चक्काजाम होने से इमरजेंसी सेवाएं बाधित हो गई हैं। मंगलवार को दूसरे दिन भी जिलेभर के 55 एंबुलेंस चालकों की जिला अस्पताल अकबरपुर में हड़ताल जारी रही। इससे मरीजों के सामने समस्या बढ़ गई। परिजन अपनों की जिंदगी बचाने के लिए मनमाना किराया देर रहे हैं।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मेें शामिल करने, एएलएस कर्मियों का समायोजन सहित छह सूत्री मांगों को लेकर जिलेभर के करीब 150 कर्मी सोमवार को एंबुलेंस जिला अस्पताल में खड़ी कर हड़ताल पर चले गए। देर रात शासन से वार्ता के बाद भी सहमति नहीं बन सकी। मंगलवार सुबह से ही कर्मियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। जिला अस्पताल में अधिकांश मरीज ऑटो, ई-रिक्शा व निजी वाहनों से पहुंचे। सबसे खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रही। यहां पर गंभीर प्रसूताओं को भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
रसूलाबाद के दशहरा प्रसाद पुरवा निवासी चंद्रभान सिंह ने बताया कि पत्नी रेखा वर्मा को प्रसव पीड़ा होने पर प्राइवेट वाहन से सीएचसी ले गए। सात किलोमीटर की दूरी के लिए वैन चालक ने 500 रुपये लिए। बन्नापुर निवासी शिवशरण ने बताया कि पत्नी नीलम देवी को प्रसव पीड़ा होने पर वह बाइक से सीएचसी लाए। इसी प्रकार तहसील कंपाउंड रसूलाबाद निवासी असीम खान ने बताया कि पत्नी आसमा को प्रसव पीड़ा होने पर वह निजी वाहन से सीएचसी लाने को मजबूर हुए। असालतगंज निवासी अनीस ने बताया कि पत्नी अनीसा को प्राइवेट वाहन से 500 रुपये देकर सीएचसी लाए हैं। 102 एंबुलेंस को फोन करने पर हड़ताल होने की जानकारी दी गई।
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मेटरनिटी विंग में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ज्योति, बबिता व आरती ने बताया कि मंगलवार की शाम तक कुल चार प्रसव हुए। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल होने से मरीज प्राइवेट वाहन से प्रसूताओं को मेटरनिटी विंग लाए। यही हाल सीएचसी अकबरपुर, शिवली, डेरापुर, राजपुर, सिकंदरा, सरवनखेड़ा आदि जगहों का रहा।
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इंसेट-
दुर्घटना में घायलों को भी नहीं मिली एंबुलेंस
एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल के चलते दुर्घटनाओं में घायलों की जान पर बनी रही। मंगलवार को अकबरपुर के माती रोड पर बीएसए कार्यालय के सामने ऑटो की टक्कर से बाइक सवार सबा निवादा रसूलाबाद निवासी जितेंद्र बाबू (20) घायल हो गया। राहगीरों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन हड़ताल के चलते कोई नहीं पहुंचा। सूचना पर पहुंचे दो पुलिस कर्मी एक ऑटो से घायल को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे। स्ट्रेचर न मिलने पर पुलिस कर्मी घायल को गोद में उठाकर इमरजेंसी ले गए। तब जाकर इलाज शुरू हो सका।
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पांच एंबुलेंस चलाकर होती रही खानापूरी
स्वास्थ्य सेवाओं को आपातकालीन व्यवस्था के तहत रखा गया है। ऐसे मेें हड़ताली कर्मियों ने 55 एंबुलेंसों का चक्का जाम करते हुए सिर्फ पांच को चालू हालत में रखा है। मंगलवार को 108 एंबुलेंस से रूरा क्षेत्र के जगनपुर गांव से बुजुर्ग को इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया गया। इसी तरह अन्य मामलों में भी आपातकालीन सेवा के नाम पर खानापूरी होती रही।
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महिला अस्पताल के बाहर प्राइवेट वाहनों का लगा रेला
एंबुलेंस चालकों की हड़ताल का सबसे अधिक असर प्रसूताओं व महिला मरीजों को उठाना पड़ रहा है। दूरदराज स्वास्थ्य केंद्र से रेफर होने वाली महिलाओं को परिजन ऑटो, ई-रिक्शा, वैन, कार आदि निजी साधनों से मनमाना किराया देकर जिला महिला अस्पताल अकबरपुर लाने को मजबूर हुए। महिला अस्पताल के बाहर पूरे दिन वाहनों का रेला लगा रहा।
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एस्मा लागू, फिर भी हड़ताल जारी
कोरोना के चलते शासन स्तर से 25 जुलाई को एस्मा लागू कर दिया गया था। इसके तहत छह माह के लिए हड़ताल को प्रतिबंधित किया गया है। पिछले दिनों शासन से ट्रांसफर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के लिपिक भी हड़ताल पर चले गए थे। जिसपर उन्हेें एस्मा के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अब संविदा स्वास्थ्य कर्मी व एंबुलेंस चालक हड़ताल पर हैं। जिससे आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इस बाबत सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि एंबुलेंस चालकों की मांगों के बाबत शासन से फैसला होना है। अभी तक एस्मा के तहत कार्रवाई के निर्देश नहीं मिले हैं।
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