उड़नपरी, स्वर्ण परी, पायोली एक्सप्रेस जैसे नाम से जानी जाने वाली देश की मशहूर एथलीट पी.टी उषा को आई.आई.टी कानपुर ने मानद उपाधि से सम्मानित कर उनकी उपलब्धियों में और इज़ाफा कर दिया है। शुक्रवार के दिन पी.टी.उषा को यह उपाधी दी गई।
बता दें 102 अतंर्राष्ट्रीय पदक समेत 1000 से अधिक पदक अपने नाम करने वाली पी.टी. उषा को 1984 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 1984 से 1989 के बीच पी.टी. उषा केवल भारत की ही नहीं पूरे एशिया की स्वर्ण परी बनकर उभरीं। लगातार 5 वर्षों तक उन्हें एशिया की नंबर वन एथलीट बनने का गौरव प्राप्त हुआ। महज एक सेकेण्ड के 100वें भाग की देरी यानि .001 से वह ओलंपिक में पदक पाने से चूक गयीं थीं।
केरल के काज़िकोड़ जिले में जन्मी पी.टी. उषा को आज दूसरी बार मानद उपाधि दी गई। इससे पहले 2002 में कुन्नूर युनिवर्सिटी ने उन्हें मानद उपाधि से नवाज़ा था। गोल्डन गाउन में सम्मान लेते समय उन्होंने कहा - “अपने लक्ष्य पर फोकस करने से ही मंज़िल आसानी से मिलती है।”