प्रकृति के करीब रहकर सामूहिक प्रयास आश्चर्यजनक सफलता देेते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा कीरत सागर के तट पर नजर आता है। दूसरे शहरों में जाकर नौकरी की तैयारी न कर पाने वाले गरीब छात्रों ने पढ़ाई का नायाब तरीका अपनाया है। वो एक क्लब बनाकर महोबा के कीरत सागर के तट पर बैठकर एक दूसरे को ज्ञान बांट रहे हैं। तीन घंटे तक सेल्फ स्टडी करने के बाद एक दूसरे की मुश्किलें हल करते हैं। इससे इन सभी की मंजिल आसान हो रही है। अब तक इस क्लब से सौ से ज्यादा युवक रेलवे, बैंक, दूरसंचार आदि विभागों में नौकरी पा चुके हैं। इससे दायरा और विश्वास दोनों बढ़ते जा रहे हैं।
सात साल पहले 20 छात्रों ने ये क्लब बनाया था। शहर के अलावा आसपास के गांव के छात्र भी सुबह पांच बजे कीरत सागर के तट पर आकर क्लब के छात्रों के साथ पढ़ने लगे। नतीजतन पहली साल ही पांच छात्र रेलवे और दूरसंचार केंद्र में नौकरी पा गए। इसके बाद इस क्लब से 200 छात्र जुड़ गए। वह रोज तीन घंटे सेल्फ स्टडी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे से सवाल जवाब करते हैं।
इतना ही नहीं, कमजोर छात्रों को अलग से टिप्स देकर उन्हें भी होनहार बनाया जा रहा है। यहां पर किसी भी छात्र से किसी तरह का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। श्याम बिहारी, प्रमोद कुमार, सीताराम, स्वदेश, उमेश, आमिर, फिरोज, मंजूर अहमद, रूपेश, आशुतोष को रेलवे में नौकरी मिली है। संजू, जयभारत, नरेश कुमार सहित कई छात्रों कोे फोर्स में नौकरी मिली है। इसके अलावा अन्य छात्रों को विभिन्न विभागों में नौकरी मिली।
भाईचारा भी कर रहे कायम
क्लब में पढ़ने वाले सभी समुदाय के छात्र मिल बैठकर घंटों पढ़ाई करके आपसी भाईचारे का भी संदेश दे रहे हैं। यहां पर सभी वर्ग के लोग वैमनस्यता से दूर सिर्फ पढ़ाई को लक्ष्य बनाकर कामयाबी पा रहे हैं।
छुट्टी में छात्रों को देते हैं टिप्स
क्लब से निकलकर 150 किलोमीटर के अंदर नौकरी पाने वाले नौजवानों का लगाव क्लब से कम नहीं हुआ है। स्थिति यह है कि छुट्टी के दिन आकर क्लब के छात्रों को अभी भी टिप्स देते हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा यहां के छात्र रोजगार से जुड़ सकें। उनकी समस्याओं से भी रूबरू होते हैं।