कानपुर देहात। जिले में जहां एक ओर डेंगू व बुखार से लोग दम तोड़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य महकमे के अफसर आंकड़ों की बाजीगरी करने में जुट गए हैं। अफसर अब तक हुई 34 में सिर्फ चार मौतों को ही डेंगू व बुखार से होना बता रहे हैं। जिस पर सवालिया निशान लग रहे हैं।
मानसूनी बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव व गंदगी के चलते मच्छरजनित व संक्रामक रोगों ने पांव पसार लिए। अफसर महज कागजों पर ही बचाव की कार्ययोजना बनाकर वाहवाही लूटने में लगे रहे।
डेंगू व बुखार से मौतों की संख्या बढ़ी तो दवा छिड़काव व साफ-सफाई शुरू कराई गई। वहीं मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सत्यापन को आनन-फानन टीमें भी बना दी गईं।
22 अगस्त से लेकर अब तक जिले में डेंगू, बुखार, डायरिया सहित अन्य बीमारियों से 34 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य महकमा डेंगू से केवल एक व बुखार से तीन मौतें होना मान रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन लोगों की स्वाभाविक व 27 की मौत अन्य कारणों से हुई है।
जिले में अब तक हुई 34 मौतों का सत्यापन कराया गया है। इनमें डेंगू से एक व बुखार से तीन मौत होना पाया गया है। अन्य की मौत स्वाभाविक व दूसरे कारणों से हुई है। बुखार के मरीज मिलने पर स्वास्थ्य टीमों को गांवों मेें भेजकर दवा वितरण व जांच कराई जा रही है। - डॉ. एपी वर्मा, संक्रामक रोग नोडल अधिकारी/डिप्टी सीएमओ
जिले में बुखार मरीजों का आंकड़ा पहुंचा 44 सौ
अफसर डेंगू व बुखार पर नियंत्रण का लाख दावा करें, लेकिन आंकड़े दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। जिले में जून से लेकर अब तक बुखार पीड़ित करीब 4400 मरीज मिल चुके हैं।
जो स्वास्थ्य विभाग के कागजों में दर्ज हैं। सैकड़ों बुखार पीड़ित ऐसे रहे, जो प्राइवेट अस्पताल व झोलाछाप के यहां इलाज कराते रहे, इनका लेखाजोखा कहीं दर्ज नहीं है।