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अनदेखी: खाकी पर जब भी आई आंच, ठंडी पड़ गई जांच, कई मामलों में फंसे हैं कमिश्नरी के पुलिसकर्मी

Wed, 14 Sep 2022 12:26 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कमिश्नरी की क्राइम ब्रांच का विवादों से नाता रहा है। अब एक पुराना मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच में तैनात सिपाही बंधन कटियार ने अप्रैल माह में रायपुरवा थाना क्षेत्र में कथित गुडवर्क किया था।
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यूपी पुलिस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कमिश्नरी पुलिस पर जब-जब जांच की आंच आई है तो जांच को ही ठंडे बस्ते में अफसरों ने डाल दिया। पिछले कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसमें पुलिसकर्मी घिर गए हैं। इन मामलों में उच्चाधिकारियों ने आननफानन जांच के आदेश भी दिए लेकिन जांचें आज भी लंबित पड़ी हैं। यह इसलिए जिससे आरोपी पुलिसकर्मी बचाए जा सकें। छह-छह महीने पुरानी जांचें भी ठंडे बस्ते में पड़ी हैं। 

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वृद्धा पर बर्बरता करने वालों पर नरमी
14 फरवरी की रात स्वरूपनगर में स्थित कॉनकॉर्ड अपार्टमेंट में मधु कपूर की हत्या कर लूटपाट हुई थी। पुलिस ने उनकी नौकरानी सावित्री को थर्ड डिग्री दी थी। पिछले सप्ताह जब वारदात का खुलासा हुआ तो नौकरानी को क्लीनचिट मिल गई थी। थर्ड डिग्री देने के मामले में एडीसीपी शिवाजी शुक्ला को जांच दी गई थी। सात महीने बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में महिला आयोग ने भी जांच के आदेश दिए थे। 

हिरासत में हुई थी महिला की मौत, जांच सिमटी
नवाबगंज पुलिस 8 मई को उन्नाव निवासी सुदामा व उसकी नाबालिग बेटी को चोरी की शिकायत के मामले में थाने ले आई थी। महिला पर एफआईआर भी दर्ज नहीं थी। देर रात तक थाने में पूछताछ करने के बाद अवैध तरीके से सुदामा व किशोरी को आशा ज्योति केंद्र में दाखिल करवा दिया गया था। दूसरे दिन सुबह केंद्र परिसर के बाथरूम में सुदामा का शव फंदे से लटकता मिला था। मामले में विभागीय व मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश हुए थे लेकिन चार महीने बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। जांच तक ही कार्रवाई सिमट के रह गई।

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इंस्पेक्टर को बचाने का प्रयास 
24 जनवरी 2022 को कर्नलगंज पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों पर असली पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। आरोपी वसीम अली को गिरफ्तार किया था। इस बीच सामने आया था कि पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया था लेकिन सिर्फ एक की गिरफ्तारी कर अन्य को छोड़ दिया था। तत्कालीन एसीपी कर्नलगंज ने तत्कालीन इंस्पेक्टर बलराम मिश्रा के खिलाफ रिपोर्ट दी थी, जिसकी जांच एसीपी सीसामऊ को दी गई थी। तब से जांच अटकी पड़ी है। सूत्रों के मुताबिक इंस्पेक्टर को बचाने के लिए कुछ पुलिसकर्मियों के बयान बदलवाने का प्रयास किया जा रहा है। 

क्राइम ब्रांच में दागी, नहीं की गई कार्रवाई
कमिश्नरी की क्राइम ब्रांच का विवादों से नाता रहा है। अब एक पुराना मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच में तैनात सिपाही बंधन कटियार ने अप्रैल माह में रायपुरवा थाना क्षेत्र में कथित गुडवर्क किया था। पहले आरोपी के पास से कोई बरामदगी नहीं थी। अचानक से सिपाही ने 48 मादक पदार्थ की पुड़िया बरामद दिखाई थी। इस पर रायपुरवा इंस्पेक्टर विनय शर्मा ने उससे सवाल जवाब किए थे। आरोप है तब उसने इंस्पेक्टर से अभद्रता की थी। प्रकरण की जांच एसीपी बाबूपुरवा ने की थी, जिसमें सिपाही दोषी पाया गया था। कार्रवाई के लिए फाइल ऊपर पहुंची तो आज तक दबी है। इसी तरह से बाबूपुरवा में शराब पीकर हादसा करने वाले दरोगा प्रदीप यादव दंडित किए जा चुके हैं। वह भी क्राइम ब्रांच में तैनात हैं। 

जो भी पुरानी जांचें लंबित पड़ी हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। तय समय में जांच व दंड प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - बीपी जोगदंड, पुलिस कमिश्नर

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