एनआईटी एमसीए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (निमसेट) 2019 का परिणाम रविवार को जारी कर दिया गया। इसमें कानपुर काकादेव कोचिंग मंडी के कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। ऑल इंडिया टॉप-500 में शहर के दो दर्जन से अधिक छात्रों ने जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है। जनरल कैटेगरी में मोहित कुमार ने ऑल इंडिया 35वीं, संजय ने 63वीं, मनीष कुमार तिवारी ने 82वीं रैंक हासिल की है। एससी कैटेगरी में दीपक कनौजिया ने आठवीं रैंक पाई। दीपक की जनरल रैंक 470 है।
इसी तरह ओबीसी कैटेगरी में प्रतीक कटियार ने 96वीं रैंक प्राप्त की। प्रतीक की जनरल रैंक 215 है। अंकुर ने ओबीसी कैटेगरी में 87वीं और सामान्य कैटेगरी में 197वीं रैंक हासिल की। सामान्य गर्ल्स कैटेगरी में शहर में सबसे बेहतर प्रदर्शन शेफाली मिश्रा का है। शेफाली ने ऑल इंडिया 124वीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा सत्यम प्रकाश ने 152वीं, दीपू ने 156वीं, प्रियांशु वाजपेयी ने 167वीं, प्रकाश गुप्ता ने 169वीं, अंकित राजपूत ने 173वीं, समर पांड्या ने 185वीं, संजीत बेहरा ने 194वीं, साक्षी ने 226वीं, अंकित द्विवेदी ने 235वीं, प्रांजल अवस्थी ने 237वीं रैंक, नीतेश ने 246वीं, रंजीत बेहरा ने 274वीं रैंक हासिल की है। दीपशी वर्मा ने ओबीसी कैटेगरी में 166वीं और सामान्य कैटेगरी में 402वीं रैंक हासिल की है। श्याम शुक्ला ने सामान्य कैटेगरी में ऑल इंडिया 397वीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा भी बड़ी संख्या में छात्रों ने सफलता हासिल की।
आमतौर पर किसी भी परीक्षा में कम अंक पाने पर बच्चे हताश होकर जिंदगी हारने लगते हैं। ऐसे लोगों के लिए यूपी के हरदोई जिले की दीपशी वर्मा नजीर हैं। दीपशी ने ऑल इंडिया स्तर पर एमसीए के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा निमसेट में ओबीसी कैटेगरी में 166 और जनरल कैटेगरी में 402वीं रैंक हासिल की है।
दीपशी बताती हैं कि उनके पिता अरुण कुमार हरदोई के कुरसठ गांव में खेती करते हैं और मां पुष्पा रानी गृहिणी हैं। हरदोई के ही एक इंटर कॉलेज से उन्होंने 12वीं की पढ़ाई की थी। इसके बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीएससी की पढ़ाई की लेकिन बेहद कम अंक आए। ओवरऑल 53 प्रतिशत बना तो दीपशी निराश हो गईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने दोबारा स्नातक करने का फैसला लिया और फिर बीएससी में 77 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद यहां कानपुर से उन्होंने निमसेट के लिए शिक्षक राम गोपाल सिंह से शिक्षा हासिल की और पहली बार में ही अच्छी रैंक हासिल कर ली।
भाई की तरह बनना चाहती हैं
दीपशी बताती हैं कि उनके भाई अनुपम ने भी यहां कानपुर में रहकर तैयारी की और निमसेट में ऑल इंडिया 33वीं रैंक हासिल की थी। तब उन्हें टॉप एनआईटी तिरुचिरापल्ली में दाखिला मिला था। 2009 में एमसीए करने के बाद उन्हें अमेजॉन ने अमेरिका में नौकरी ऑफर की और अब वह अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं। दीपशी बताती हैं कि उनके लिए बड़ा भाई हमेशा आइडियल रहा है और वह उन्हीं की तरह बनना चाहती हैं।
निमसेट में ऑल इंडिया 397वीं रैंक हासिल करने वाले श्याम शुक्ला मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। पिता राकेश शुक्ला एलआईसी में एडवाइजर और मां रमा शुक्ला गृहिणी हैं। दामोदरनगर में रहने वाले श्याम के बड़े भाई आयुष शुक्ला ने इसी साल सीएसए से बीटेक किया है।
श्याम बताते हैं कि उन्होंने 2016 में चाचा नेहरू इंटर कॉलेज से 87 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण की थी। इसके बाद वीरेंद्र स्वरूप इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर स्टडीज से बीसीए किया। इस बार फाइनल ईयर है। श्याम बताते हैं कि आगे वह निमसेट की रैंकिंग के आधार पर एनआईटी प्रयागराज (इलाहाबाद) या फिर एनआईटी भोपाल से एमसीए करना चाहते हैं। श्याम का लक्ष्य है कि वह एमसीए के बाद आईटी सेक्टर में नाम कमाएं।