वर्ष 2010 या उसके बाद एलएलबी परीक्षा पास करने वाले वकीलों को ऑल इंडिया बार एक्जामिनेशन (एआईबीई) पास करना जरूरी कर दिया गया है।
बार कौंसिल ने आदेश दिया है कि यह परीक्षा पास न करने वाले वकील बार और लॉयर्स एसोसिएशन के सदस्य तो रह सकते हैं लेकिन उन्हें इनके चुनाव में वोटिंग का अधिकार नहीं होगा।
इन्हें अब बार एसोसिएशन में अंडरटेकिंग देनी होगी। इसमें वह लिखकर देंगे कि दो साल के अंदर वह यह परीक्षा पास कर लेंगे। अंडरटेकिंग देने के दो साल के अंदर अगर परीक्षा पास नहीं करेंगे तो उन्हें वकालत करने की अनुमति नहीं होगी।
बता दें कि 2010 या उसके बाद एलएलबी पास करने वाले शहर में करीब डेढ़ हजार वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं।
बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के सचिव प्रेम नाथ त्यागी ने बार एसोसिएशन अध्यक्ष और महामंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि बार कौंसिल ने नियम बनाकर स्पष्ट कर दिया है कि जिस अधिवक्ता ने कानून की परीक्षा वर्ष 2010 या उसके बाद पास की है तो वह बार कौंसिल में अंडरटेकिंग देगा।
इसमें लिखना होगा कि वह दो साल के अंदर ऑल इंडिया बार एक्जामिनेशन (एआईबीई) पास कर लेगा। ऐसा न करने पर वह किसी भी केस में वकालतनामा लगाने के योग्य नहीं होगा। बार कौंसिल ने नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे अधिवक्ताओं को बार एसोसिएशन का प्रोवेंशियल सदस्य तो बनाया जा सकता है लेकिन उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं होगा।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष सत्येंद्र द्विवेदी ने बताया कि बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के सचिव का पत्र आया है। उसकी एक कॉपी नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई है। 2010 या उसके बाद कानून की परीक्षा पास करने वाले साथी जल्द से जल्द बार एसोसिएशन दफ्तर में अंडरटेकिंग दे दें। वोटर लिस्ट से 2010 या उसके बाद एलएलबी पास करने वाले युवा साथियों की सूची तैयार कराई जा रही है।