डॉ. वत्सल दीक्षित के अनुसार प्रश्नपत्र में करीब 15 से 20 प्रश्न काफी चुनौतीपूर्ण रहे। ऐसे में इस बार कटऑफ थोड़ा ऊपर जाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में अभ्यर्थियों की विषय की जानकारी के साथ-साथ क्लीनिकल परिस्थितियों को समझने और व्यावहारिक निर्णय लेने की क्षमता को भी परखा गया।
माता-पिता के लिए भी परीक्षा जैसा अनुभव
कानपुर विश्वविद्यालय के दयानंद विधि महाविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अनुज कुमार दीक्षित एडवोकेट ने नीट पीजी परीक्षा को लेकर कहा कि यह केवल छात्रों की परीक्षा नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और परिवार की भी परीक्षा होती है। छात्र रात-रात भर पढ़ाई करते हैं, वहीं माता-पिता भी उनकी तैयारी और भविष्य को लेकर चिंता में जागते रहते हैं।
उन्होंने परीक्षा की प्रक्रिया पर संतोष जताते हुए कहा कि उम्मीद है कि परिणाम छात्रों के लिए सफल और बेहतर रहेगा। सरकार की ओर से नीट पीजी परीक्षा में किए गए सुधार छात्रों और उनके परिवारों के हित में हैं। उन्होंने बताया कि एमडी में जनरल मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और डर्मेटोलॉजी जैसी विशेषज्ञताओं को छात्र-छात्राएं प्राथमिकता देते हैं। वहीं एमएस में जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और गाइनकोलॉजी प्रमुख पसंद में शामिल हैं। पीजी डिप्लोमा में डीजीओ, डीसीएच और डीएलओ जैसे पाठ्यक्रमों को भी छात्र अपनी प्राथमिकता के अनुसार चुनते हैं।