प्रधानों ने स्पष्ट कहा कि यदि उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया गया तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे। महाचौपाल में प्रशासक कार्यकाल के दौरान आने वाली दिक्कतों और ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के सामने आ रही बाधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्राम प्रधानों ने अपने-अपने कार्यकाल में अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों से जुड़ी समस्याएं भी साझा कीं।
सचिवों के रवैये पर उठाए सवाल
प्रधानों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सचिवों का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। उनका कहना था कि कई मामलों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रधानों ने अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों के साथ बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।
अधिकारों में कटौती पर सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
महाचौपाल में प्रधानों ने एक स्वर में अपने संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों को पर्याप्त अधिकार मिलने पर ही वे गांवों में विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से करा सकेंगे। प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारों में कटौती की गई या उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से अलग किया गया तो सभी सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होंगे।