छह साल के सौरव भी नहीं पीछे
अष्टमी के दिन फजलगंज से छह वर्षीय सौरभ ने भी मुंह में सांग लगाकर मां के दरबार में अपनी मुराद के लिए अर्जी लगाई सौरव की मां अंजली देवी ने बताया शान का वजन 30 किलो है और यह छह फीट की है। वहीं, कोमल तिवारी ने पहली बार अपनी मन्नत पूरी होने पर 30 किलो वजन का सांग अपने मुंह में लगवाया।
किदवई नगर के रमेश सिंह ने बताया वह पिछले कई सालों से मां के दरबार में मुंह में सांग लगाकर जा रहे हैं। इस बार उन्होंने 220 किलो वजन का सांग अपने मुंह में लगाकर मां बारा देवी के दर्शनों के लिए घर से निकले हैं। उनका पूरा परिवार उनके साथ सांग को उठाने में मदद कर रहा है।
पूरे जत्थे को 45 साल से लगा रहे हैं सांग
बारादेवी मंदिर पहुंचे जवारा जुलूस में टोली के सदस्य रहे शंकर लाल बाबा ने बताया पिछले 45 सालों से वाह भक्तों के गालों में सांग लगाने का काम कर रहे हैं। अब तक उन्होंने 65000 से ऊपर लोगों के मुंह में सांग लगा चुके हैं। उन्होंने बताया किसी भी व्यक्ति के सांग लगाने से पहले 24 घंटे बाद लगातार पूजा करते हैं।
इस तरह हुआ नामकरण
मंदिर की देखरेख करने वाले राजू माली ने बताया कि पिता से हुई अनबन के कारण उनके गुस्से के प्रकोप से बचने के लिए एक साथ बारह बहनें घर से भागकर यहां मूर्ति के रुप में स्थापित हो गईं। सालों बाद यही बारह बहनें बारादेवी के नाम से प्रसिद्ध हुईं। कहा जाता है कि बारह बहनों के श्राप देने से पिता भी पत्थर रुप में हो गए थे।