बारादेवी मंदिर का इतिहास करीब 1500 साल पुराना है। तब बारादेवी इलाका पूरा जंगल हुआ करता था। बारादेवी मंदिर के प्रबंधक रूपम शर्मा के अनुसार अर्रा में रहने वाले लतुआ वीर बाबा की 12 पुत्रियों में सबसे बड़ी पुत्री का विवाह बर्रा गांव में तय हुआ था। जिस दिन बरात आने वाली थी, उसी दिन पिता की नीयत अपनी बेटी पर खराब हो गई थी।
इसके बाद बड़ी बेटी सभी बहनों के साथ घर से बारादेवी आ गई थी। यहां भगवान से प्रार्थना करते हुए खुद को पत्थर का बनाने की मांग की थी। इसके बाद सभी बहनें पत्थर की हो गईं। तब यहां मठिया की स्थापना की गई थी। तभी से इसे बारादेवी मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। प्रबंधक के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि सभी बहनों के श्राप से पिता भी पत्थर के हो गए थे।