आमदनी होने पर धनराशि वापस समूह के खाते में जमा करनी होती है। विभाग से मिले दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2019 से वर्ष 2023 तक जिले में 6222 समूह बनाए गए। इसमें 5689 समूहों को रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) के तहत 56.89 लाख रुपये और 5016 समूहों को कम्यूनिटी इनवेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के तहत 55.17 करोड़ रुपये जारी किए। इसमें 10 समूह ही ऐसे हैं, जिन्होंने लोन लेने के बाद रोजगार शुरू किया और एक से दो लाख रुपये सालाना की कमाई भी कर रहे हैं। शेष एक भी समूह रोजगार नहीं शुरू कर पाया। विभाग ने भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की।
कैसे काम करता है समूह
समूह बनाने की जिम्मेदारी ब्लॉक मिशन मैनेजर की होती है। कम से कम 10 महिलाओं का एक समूह बनाया जाता है। इसके बाद समूह के नाम से खाता खोला जाता है। नया समूह बनने के तीन माह बाद खाते में रिवॉल्विंग फंड के तहत 15 हजार रुपये दिए जाते हैं। काम शुरू होने और यह पैसा वापस करने पर छह माह बाद कम्यूनिटी इनवेस्टमेंट फंड के तहत 1.10 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके बाद समूह को रोजगार बताकर धनराशि निकालनी होती है।
कागजों सबसे ज्यादा पशुपालन का रोजगार
एनआरएलएम विभाग में कागजों में सबसे ज्यादा पशुपालन के 1158 रोजगार समूहों के नाम पर दर्ज हैं। इसके अलावा कॉस्मेटिक शाॅप, ब्यूटी पार्लर, सिलाई कार्य, सब्जी मसाला की पैकिंग, अचार-मुरब्बा, आटा-चक्की, फूलों की खेती व अन्य कार्य कागजों में दिखाए गए हैं। हालांकि हकीकत में नाम मात्र के ही समूह सक्रिय हैं।
एक नजर समूह की संख्या पर
ब्लॉक समूह
भीतरगांव 572
बिल्हौर 594
चौबेपुर 584
घाटमपुर 857
ककवन 328
कल्याणपुर 460
पतारा 811
सरसौल 687
शिवराजपुर 491
बिधनू 838
समूहों की ऑनलाइन फीडिंग की जा रही है। समूहों पैसा लेने के बाद बैंक में जमा कर रहे हैं कि नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। समूह अपना खुद रोजगार कर रहे हैं। उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जाता है। -सुधा शुक्ला, उपायुक्त एनआरएलएम