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UP: रोजगार के लिए मिले 55 करोड़, फिर भी 5600 स्वयं सहायता समूह बेरोजगार, विभाग के पास कोई लेखाजोखा भी नहीं

Tue, 16 Apr 2024 09:54 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पांच साल में केंद्र सरकार ने 5689 समूहों को 55.74 करोड़ रुपये दिए। इनमें से केवल 10 समूह ही रोजगार शुरू कर सके हैं। वहीं, शेष समूहों के न रोजगार का पता और न ही लोन के रूप में मिले धन का।
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,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर में महिलाओं के उत्थान के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित स्वयं सहायता समूह सरकार से करोड़ों रुपये लेने के बाद भी रोजगार शुरू नहीं कर पाए। पांच साल में केंद्र सरकार ने जिले के 5689 समूहों को करीब 55.74 करोड़ रुपये दिए थे। केवल 10 समूह ही छोटे स्तर पर रोजगार कर रहे हैं। शेष समूहों ने अपने निजी काम में ही धनराशि खर्च कर दी।

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खुद को बचाने के लिए विभाग कागजों में समूहों का रोजगार तो दिखा रहा, लेकिन हकीकत में पैसा खर्च कहां हुआ, इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। सरकार की मंशा थी कि गरीब वर्ग की ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर खेती-किसानी, सिलाई की दुकान या अन्य कोई काम समूह में शुरू कर खुद के पैरों पर खड़ी हो सकें। इसी क्रम में गांव-गांव में स्वयं सहायता समूह बनाए गए थे। योजना के अनुसार बैंक से लोन लेने के बाद काम शुरू करना होता है।

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आमदनी होने पर धनराशि वापस समूह के खाते में जमा करनी होती है। विभाग से मिले दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2019 से वर्ष 2023 तक जिले में 6222 समूह बनाए गए। इसमें 5689 समूहों को रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) के तहत 56.89 लाख रुपये और 5016 समूहों को कम्यूनिटी इनवेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के तहत 55.17 करोड़ रुपये जारी किए। इसमें 10 समूह ही ऐसे हैं, जिन्होंने लोन लेने के बाद रोजगार शुरू किया और एक से दो लाख रुपये सालाना की कमाई भी कर रहे हैं। शेष एक भी समूह रोजगार नहीं शुरू कर पाया। विभाग ने भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की।

कैसे काम करता है समूह
समूह बनाने की जिम्मेदारी ब्लॉक मिशन मैनेजर की होती है। कम से कम 10 महिलाओं का एक समूह बनाया जाता है। इसके बाद समूह के नाम से खाता खोला जाता है। नया समूह बनने के तीन माह बाद खाते में रिवॉल्विंग फंड के तहत 15 हजार रुपये दिए जाते हैं। काम शुरू होने और यह पैसा वापस करने पर छह माह बाद कम्यूनिटी इनवेस्टमेंट फंड के तहत 1.10 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके बाद समूह को रोजगार बताकर धनराशि निकालनी होती है।

कागजों सबसे ज्यादा पशुपालन का रोजगार
एनआरएलएम विभाग में कागजों में सबसे ज्यादा पशुपालन के 1158 रोजगार समूहों के नाम पर दर्ज हैं। इसके अलावा कॉस्मेटिक शाॅप, ब्यूटी पार्लर, सिलाई कार्य, सब्जी मसाला की पैकिंग, अचार-मुरब्बा, आटा-चक्की, फूलों की खेती व अन्य कार्य कागजों में दिखाए गए हैं। हालांकि हकीकत में नाम मात्र के ही समूह सक्रिय हैं।

ये समूह कर रहे अच्छा काम

ब्लॉक       समूह का नाम     रोजगार
घाटमपुर  कामतानाथ महिला स्वयं सहायता समूह वर्मी कंपोस्ट अचार-मुरब्बा
घाटमपुर    मिलन महिला स्वयं सहायता समूह नमकीन पैकिंग
घाटमपुर   सहेली महिला स्वयं सहायता समूह मुर्गी पालन
भीतरगांव     रमाबाई महिला स्वयं सहायता समूह स्ट्राबेरी उत्पादन
बिल्हौर दममदार महिला स्वयं सहायता समूह  लेदर लुक जैकेट
कल्याणपुर मां तुलसी महिला स्वयं सहायता समूह अगरबत्ती बनाना
चौबेपुर   मां अंबे महिला एवं स्वयं सहायता समूह   मिट्टी से मूर्ति बनाना
चौबेपुर अन्नपूर्णा महिला स्वयं सहायता समूह आर्गेनिक उत्पाद
ककवन    निजामी बाबा महिला स्वयं सहायता समूह स्कूल बैग
पतारा     कामता बाबा स्वयं सहायता समूह   मिठाई का डब्बा
      

एक नजर समूह की संख्या पर

ब्लॉक             समूह
भीतरगांव        572
बिल्हौर           594
चौबेपुर           584
घाटमपुर         857
ककवन           328
कल्याणपुर      460
पतारा             811
सरसौल           687
शिवराजपुर      491
बिधनू             838
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समूहों की ऑनलाइन फीडिंग की जा रही है। समूहों पैसा लेने के बाद बैंक में जमा कर रहे हैं कि नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। समूह अपना खुद रोजगार कर रहे हैं। उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया जाता है।  -सुधा शुक्ला, उपायुक्त एनआरएलएम
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