कानपुर में असहनीय दर्द की दवा का नशे के लिए हो रहे दुरुपयोग के मामले में नारकोटिक्स विभाग ने मंगलवार को बर्रा में छापा मारा। यह कार्रवाई हेमंत विहार बर्रा निवासी दवा के थोक व्यापारी नितिन अग्निहोत्री की जिंग लाइफ केयर नाम से चल रही फर्म पर की गई। हिमाचल से आई नारकोटिक्स की टीम व बर्रा पुलिस को व्यापारी ने दवा संबंधी जानकारी दी। ड्रग इंस्पेक्टर रेखा सचान ने बताया कि हिमाचल की दवा फैक्टरी में बनने वाली एक दवा जो असहनीय दर्द में काम आती है, उस दवा का नशे के लिए दुरुपयोग हो रहा था। जांच में पता चला कि दवा बर्रा के थोक व्यापारी नितिन अग्निहोत्री से खरीदी गई थी। छापे के दौरान पता चला कि व्यापारी ने दवाएं जोधपुर की केसरफार्मा कंपनी को 20 लाख टेबलेट बेच दी है, जिसका रिकॉर्ड भी व्यापारी ने उपलब्ध कराया। छह घंटे की जांच के बाद टीम कागजात लेकर हिमाचल के लिए रवाना हो गई। रेखा सचान ने बताया कि दो दवाओं के नमूने भी लिए गए हैं।
फंगल इंफेक्शन की दवा नकली, सर्जरी की दवा मानकविहीन
बिरहाना रोड स्थित मेडिकल स्टोर ज्ञानवीर निगम ब्रदर्स के यहां से लिए गए दवा के सैंपल फेल हो गए। सात नमूनों में से दो नमूनों की आई रिपोर्ट में एक दवा अधोमानक व दूसरी नकली पाई गई है। केनाकॉर्ट इंजेक्शन सर्जरी आदि में काम आता है। यह अधोमानक पाई गई। डेफकॉर्ट 6 टेबलेट फंगल इंफेक्शन में प्रयोग की जाती है। यह नकली पाई गई है। ड्रग इंस्पेक्टर रेखा सचान ने बताया कि आठ अगस्त को बिरहाना रोड के ज्ञानवीर निगम ब्रदर्स के यहां 15 और रिजुल गुप्ता मेडीलाइफ एजेंसी के यहां तीन नमूने लिए गए। इसमें छह नमूने फेल पाए गए थे, जिसकी रिपोर्ट अक्तूबर की शुरूआत में आई। वहीं बाकी बचे नौ नमूनों में से दो दवाओं की रिपोर्ट भी बुधवार को आ गई। जांच के बाद से ही मेडिकल स्टोर के क्रय विक्रय पर रोक लगा दी गई है। अभी सात नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है।