बांदा जिले में मटौंध के गोयरा मुगली की शहजादी को मृत्युदंड से बचाने के लिए धर्म गुरु भी सामने आ गए हैं। इन लोगों ने भारत सरकार से मांग की है कि वह बेटी की जान बचाने को संयुक्त अरब अमीरात की हुकूमत से बात करें। किसी बेकसूर को मृत्युदंड नहीं होना चाहिए।
भारत सरकार करे अरब हुकूमत से बात
नवाबी जामा मस्जिद और ईदगाह के मुतावल्ली/अध्यक्ष डॉ. शेख सादी जमा का कहना है कि दुबई की अदालत ने शहजादी को बच्चे की कथित हत्या के जुर्म में शरई कानून के तहत सजाए मौत सुना दी है। शहजादी के बेकसूर होने के उसके पिता और परिजनों ने जो तथ्य गए हैं, उनके आधार पर भारत सरकार को संयुक्त अरब अमीरात की सरकार से बात करके शहजादी का मृत्युदंड रुकवाना चाहिए। शहजादी को उसके माता-पिता को वापस किए जाने की प्रक्रिया अमल में लाना चाहिए। उधर, शहर काजी मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) का कहना है कि दुबई हुकुमत ने अगर शरई कानून के तहत शहजादी को सजाए मौत की सजा दी है तो कुछ शरई शर्तों को पूरा करके सज़ा माफ भी कराई जा सकती है। शहजादी के बूढ़े मां-बाप और उनकी हमदर्दी में कोशिशें कर रहे तमाम सियासी नुमाइंदों, संगठनों, वकीलों वगैरह के जज्बात की कद्र करते हुए अरब हुकूमत को फैसला लेना चाहिए। भारत की हुकूमत को इसके लिए भरपूर कदम उठाने चाहिए।