डीएम और एसपी को बैरक में ताजे व ठंडे फल, खाना, मेवा, पानी की बोतल, होटल से मंगाई गई खाने की सीलबंद थाली मिली। पूछताछ में जेल अधिकारियों से यह भी जानकारी मिली कि अक्सर मुख्तार की बैरक में चिकन-बिरयानी भी आती थी। डिप्टी जेलर सहित अन्य बंदी रक्षक दावत करते थे। डिप्टी जेलर वीरेश्वर सिंह का कहना था कि मुख्तार के लिए फल, मेवा, खाना आदि प्रभारी जेलर के आदेश पर बाहर से मंगाया जाता था। फ्रिज व कूलर भी उन्हीं के आदेश पर रखवाया गया। यह भी बताया गया कि यह सब करते समय सीसीटीवी बंद कर दिए जाते थे।
शहर में रहते हैं मुख्तार के गुर्गे
मुख्तार के परिजन शहर के एक मोहल्ले में बाकायदा किराये का मकान लिए हुए हैं। वहां हर समय मुख्तार के गुर्गे पड़े रहते हैं। इनके नेटवर्क का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 27 मार्च को गोपनीय तरीके से मुख्तार को पेशी पर लखनऊ ले जाने की जानकारी लीक हो गई थी। लखनऊ जाते समय मुख्तार की गाड़ी के पीछे कई गुर्गे लग गए और पल-पल की जानकारी लीक करते रहे।