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यूपी: खस्ताहाल मकान, खतरे में कानपुर के आठ हजार लोगों की जान

Wed, 16 Jun 2021 12:51 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

बारिश का मौसम जैसे ही आता है, जर्जर भवनों के मालिकों द्वारा भवनों को गिराने की एप्लिकेशन नगर निगम में आने लगती हैं। इस बार भी नगर निगम में 500 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कानपुर समेत पूरे यूपी में मानसून सक्रिय हो चुका है। ऐसे में कानपुर में जगह-जगह जर्जर मकान आसपास के लोगों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। नगर-निगम सिर्फ नोटिस तामील कर मगन है। आंकड़ों में करीब 700 ऐसे मकान हैं जो कभी भी आंधी-तूफान और बारिश के बीच ढह सकते हैं।

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पुन: आंकलन करने पर ऐसे मकानों की संख्या दोगुनी हो सकती है। इन मकानों में रहने वाले 8 हजार से ज्यादा लोगों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। बारिश का मौसम जैसे ही आता है, जर्जर भवनों के मालिकों द्वारा भवनों को गिराने की एप्लिकेशन नगर निगम में आने लगती हैं।

इस बार भी नगर निगम में 500 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। इस पर कार्रवाई के नाम पर जोनल अधिकारी नोटिस देकर खानापूर्ति कर लेते हैं। इस बार भी नगर निगम 100 से ज्यादा जर्जर भवनों को खुद से गिराने और खाली करने की नोटिस जारी कर चुका है।
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अधिकारियों का काम जर्जर भवनों को सिर्फ चिन्हित करने का रह गया है। नगर निगम अगर बिल्डिंग गिराता है तो गिराने का खर्च मकान मालिक को ही देना होता है। वहीं कानपुर में 150 से अधिक जर्जर भवन ऐसे हैं, जिनमें मकान मालिक और किराएदार के बीच कोर्ट में केस चल रहे हैं।

फैसले के इंतजार में कई जर्जर भवन गिर भी चुके हैं। बीते 4 सालों में नगर निगम ने महज 12 भवनों को ही गिराया है। शहर के बेकनगंज, कछियाना, हरबंशमोहाल, टोपी बाजार, मछलीबाजार, नौघड़ा, नयागंज, मनीराम बगिया, बांसमंडी, लाटूश रोड, चमनगंज, लक्ष्मीपुरवा, लाठीमोहाल, सिरकीमोहाल, भन्नानापुरवा, चटाई मोहाल, जवाहर नगर, अनवरगंज आदि क्षेत्रों में जर्जर भवनों की संख्या ज्यादा है।

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