मोहनी ग्रुप में हुए 2 करोड़ 40 लाख रुपये के फ्रॉड में पुलिस की जांच में अहम खुलासा हुआ है। लोन संबंधी जो दस्तावेज लगाए गए थे वह फर्जी थे, उसमें हस्ताक्षर भी फर्जी बनाए गए थे। इसलिए पुलिस इस तथ्य की और पुष्टि करने के लिए हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराएगी।
इसके लिए पुलिस ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी के निदेशक दिनेश चंद्र ने अपने भाई और कंपनी के निदेशक रमेश चंद्र अग्रवाल, उनके बेटे व बहू समेत छह लोगों पर कोतवाली थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था।
आरोप है कि आरोपियों ने कोरोना काल में राहत लोन के नाम पर दो करोड़ चालीस लाख रुपये का फर्जीवाड़ा किया। पुलिस अफसरों ने जब जांच आगे बढ़ाई तो पता चला कि लोन की कागजी कार्रवाई व पूरी प्रक्रिया यस बैंक की गुरुग्राम शाखा से की गई थी।
जो दस्तावेज लगाए गए थे वह फर्जी तरीके से तैयार किए गए। बोर्ड बैठक के फर्जी गारंटर संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए। जांच में ये भी पता चला कि दस्तावेजों में जो वादी के हस्ताक्षर किए गए थे वह फर्जी हैं। कोतवाली इंस्पेक्टर रामकुमार गुप्ता का कहना है कि हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।
इसके लिए वादी के हस्ताक्षर का नमूना लेकर लैब भेजा जाएगा। इंस्पेक्टर ने बताया कि लोन पहले जारी किया गया जबकि दस्तावेज 12 दिन बाद दिए गए। इसलिए इसमें बैंक की तरफ से भी गड़बड़ी की आशंका है। इस बिंदु की गहनता से जांच की जा रही है।