40 बच्चों की मां मीनाक्षी आनंद
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कानपुर की मीनाक्षी आनंद 40 बच्चों की ‘मां’ हैं। आखिर मीनाक्षी इन गरीब बच्चों की ‘मां’ कैसे बन गईं इसके लिए उन्होंने सुनाई अपनी दास्तान।
गरीबी के चलते पढ़ाई-लिखाई न कर पाने वाले बच्चों की हालत ने डाइटीशियन मीनाक्षी आनंद को ऐसा झकझोरा कि उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। वर्तमान में वह 40 बच्चों की पढ़ाई और इलाज की जिम्मेदारी लिए हुए हैं। ये बच्चे मीनाक्षी को मां कहकर पुकारते हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता नहीं हैं तो कई बच्चों के माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्चा उठा पाने में सक्षम नहीं हैं।
मकरावटगंज निवासी मीनाक्षी ने बताया कि उनकी कजिन सिस्टर को उनके पति छोड़कर चले गए थे। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और इलाज में जो उन्हें परेशानियां उठानी पड़ीं, वह बता नहीं सकती हैं। उनकी परेशानियों को देखकर ही उन्होंने गरीब और बेसहारा बच्चों की मदद करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने फरवरी 2017 में प्रस्तुति फाउंडेशन नाम से संस्था का गठन किया। सबसे पहले ग्वालटोली की नीतू पासवान और गुनगुन की पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा लिया। इनके परिजन बच्चों को पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने अपने संगठन से 75 महिलाओं को जोड़ा। इन महिलाओं से हर माह दो सौ रुपये लेकर अपनी सेवाभाव का दायरा और बढ़ाया। हर बच्चे की जरूरत की किताबें, बस्ते, कॉपी भी खुद ही खरीद कर देती है। जरूरत पड़ने पर इलाज भी कराती है। अंशु जायसवाल और प्रियांशु जायसवाल के माता-पिता नहीं है। इन दोनों बच्चों की दादी सब्जी का ठेला लगाकर किसी तरह रोटी का ही इंतजाम कर पाती हैं। इसी तरह वैष्णवी, राज यादव और शशि के भी माता-पिता नहीं हैं। इन बच्चों के समेत 40 बच्चे मीनाक्षी आनंद की ममता में फल फूल रहे हैं।