जांच में पता चला कि दंपती ने बेटी की शादी के लिए आवेदन किया था, जबकि दंपती की बेटी छोटी है, फर्जी तरीके से लाभ पहुंचाया गया। सीडीओ के आदेश पर समाज कल्याण विभाग के सुपरवाइजर उमेश चंद्र दीक्षित ने फरवरी 2021 को दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
कानपुर में शादी अनुदान राशि हड़पने के मामले में पुलिस की विवेचना तत्कालीन एसडीएम वरुण पांडेय के बयान दर्ज न हो पाने के कारण अधर में लटकी है। विवेचक के कई बार संपर्क करने के बाद भी एसडीएम बयान दर्ज नहीं करा सके हैं।
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अभी तक की जांच में पुलिस को कार्यालय के एक क्लर्क व दलाल की अहम भूमिका मिली थी। बर्रा 8 निवासी प्रदीप कुमार और उसकी पत्नी रजनी शर्मा ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित शादी अनुदान योजना में फर्जी तरीके से 20 हजार रुपये हड़पे थे।
जांच में पता चला कि दंपती ने बेटी की शादी के लिए आवेदन किया था, जबकि दंपती की बेटी छोटी है, फर्जी तरीके से लाभ पहुंचाया गया। सीडीओ के आदेश पर समाज कल्याण विभाग के सुपरवाइजर उमेश चंद्र दीक्षित ने फरवरी 2021 को दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। सूत्रों के अनुसार मामले में तत्कालीन एसडीएम वरुण पांडेय की भूमिका भी संदिग्ध मिली थी। उनके बयान दर्ज करने के लिए पुलिस ने उनसे कई बार संपर्क किया, लेकिन वह अपने बयान दर्ज कराने से कतरा रहे हैं।
विवेचक ने उनसे थाने आने या उनके बताए स्थान पर खुद ही जाकर बयान दर्ज करवाने की भी अपील की है। एसडीएम के बयान दर्ज न करा पाने के कारण विवेचना आगे नहीं बढ़ सकी है। इससे मुकदमे में अन्य आरोपियों के नाम भी नहीं बढ़ सके। विवेचक ने इस संबंध में अपने अधिकारियों को भी अवगत कराया है।