कानपुर। परिवहन विभाग ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त कदम उठाया है। बसों से हो रहे हादसों के मद्देनजर एक नई डिजिटल प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत स्कूली बसों, वैन और ऑटो की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। शहर में चल रही नौ हजार स्कूली बसों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। 150 बसों पर लगाए भी जा चुके हैं। क्यूआर स्कैन करते ही स्कूली वाहनों की पूरी जानकारी देखी जा सकेगी।
एआरटीओ और पीटीओ को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारी स्कूलों में जाकर वाहनों की जांच कर डाटा को विशेष पोर्टल पर फीड कर रहे हैं। इसे मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से भी जोड़ा गया है। इससे लखनऊ से लेकर जिलों तक हर स्तर पर निगरानी की जा सकेगी। एटा में हुए स्कूल बस हादसे में छात्रा की मौत के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बिना पंजीकरण और उपयुक्तता प्रमाणपत्र के दौड़ रहे वाहनों पर अब जीरो टॉलरेंस नीति लागू होगी।
जिलाधिकारी, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी एक क्लिक में वाहनों की स्थिति जांच सकेंगे। बसों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वाहन की उपयुक्तता, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और वैधता अवधि की जानकारी मिलेगी। चालक-परिचालक की पूरी जानकारी भी तुरंत देखी जा सकेगी। 15 अप्रैल तक सभी बसों की डिटेल पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि केवल वाहन मालिक ही नहीं, स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदार होगा। बच्चों को लाने-ले जाने वाले हर वाहन की सूची और रिकॉर्ड स्कूलों को देना होगा। नियमों की अनदेखी पर स्कूलों पर भी कार्रवाई होगी। अभिभावक वाहन मालिक या स्कूल से सवाल कर शिकायत दर्ज कर पाएंगे। इससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
वर्जन-
जिले में दौड़ रहीं नौ हजार स्कूली बसों की फिटनेस जांचने के लिए एआरटीओ और यात्री कर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। अब फिटनेस के मानक पूरे किए बगैर बस बच्चों को नहीं ले जा सकेगी। - आलोक कुमार, एआरटीओ प्रशासन